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शेर-ओ-शायरी

चाँद

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प्रसन्नता

mark-adriane-mus2rrayruq-unsplash~31897108077957270491..jpgPicture credit: Internet

“खुशनुमा पल”

चलिए कुछ बात खुशनुमा पलों की करते हैं,
दर्द में बहोत हुई कलमें गीली,
आज़माईश आज-कल के लम्हों की करते हैं।

बीते कुछ दिनों में हुआ, कुछ ऐसा,
जिनका ज़िक्र करना ज़रूरी हो गया,
जैसे घने जंगल में, बहोत हो जानवर,
मैं इक अकेला कस्तूरी हो गया।

ऐसी ही कुछ अनुभूति मुझे भी हुई,
जब नए अक्सों से मिरा मिलन हुआ,
विचारों का मेल-जोल हुआ,
और शब्दों का सम्मिलन हुआ,
हाँ ऐसे ही मैं हिरण हुआ,
ग़मों का अस्त हुआ,
खुशियों का किरण हुआ,
बुरे का जाना हुआ,
अच्छे का सुमिरन हुआ।

अभी तो इस दौर की शुरुआत है,
आगे का कुछ सोचा नहीं,
खुशियों का चहचहाना हुआ,
ग़मों को पूछा नहीं,
यह रस्ता ले जाएगा कहाँ, पता नहीं,
अब इन लम्हों को सहेजने में भी कोई ख़ता नहीं।

अभी देखते हैं कहां तक जाना होगा,
पर इतना जानता हूँ, खूबसूरत नज़राना होगा,
यादों का तराना होगा, ख़्वाबों का आना होगा,
और ऐसे ही निर्माण मिरा आगे का आशियाना होगा।

-vj

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कविता

Downcast

20200218103220.jpgPicture credit: Internet

“देर तक देखते रहे”

सज़ा ही कुछ ऐसी मिली, देर तक देखते रहे,
अपनों का चले जाना हुआ, ग़म से आँख सेंकते रहे।

इफा का टूट जाना हुआ, आस खोजते रहे,
तिफ़ल का खिलखिलाना गया, अश्क़ पोछते रहे।

हम बे’आवाज़ हुए फिर से इक दफ़ा…..

शय का शय से खो जाना हुआ, हाथ फेरते रहे,
सज़ा ही कुछ ऐसी मिली, देर तक देखते रहे।

-vj

शब्दावली: इफा: वचन, तिफ़ल: बच्चा, शय: चीज़

Translated:

The punishment was something like this, kept watching for a long time,
We lost ours loved ones, kept on sobbing with sorrowed lime.

Promises are broke down, kept searching consolation,
There was a blossoming of baby and tears got cancellation.

We got lost again once again …..

The object is lost from the object, we become empty handed,
The punishment was something like this, kept watching for a long time.

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कविता

Happy Holi

HoliImage credit: Internet

“रंगों का त्यौहार है आया”

रंगों का त्यौहार है आया,
उमंगों का त्यौहार है लाया,
संग लिए सुख-समृद्धि के पल,
घर को फिर इक बार है आया,
रंगों का त्यौहार है आया।

लाल गुलाबी हरी केसरी
से टब पिचकारी भरी-भरी,
नीली-पीली, लाल-गुलाल
तन-मन को करते निहाल,
और भोजों का भरमार लिए,
जगत अन्न व्यवहार है लाया,
रंगों का त्यौहार है आया।

झांझ-झंकार, मठ-मृदंगे,
और पग साथ थिरकेंगे,
बच्चे चोरी-चोरी से आ के,
रंग-रंग के गुलाल छिड़केंगे,
और पिचकारी की धार से,
इंद्रधनुष का फव्वारा निकलेगा,
किसी की हाथ में पकवानें,
किसी में गुब्बारा निकलेगा,
ऐसे ही सज-धज के फिर से,
वर्षों का उपहार है आया,
रंगों का त्यौहार है आया,
उमंगों का त्यौहार है लाया।

-vj

Holi is a Hindu spring festival celebrated in the Indian subcontinent, also known as the “festival of colours”. It signifies the victory of good over evil, the arrival of spring, end of winter, and for many a festive day to meet others, play and laugh, forget and forgive, and repair broken relationships. It is also celebrated as a thanksgiving for a good harvest.

People take part in Holi all around the world, but it is celebrated the most in parts of India and Nepal. It is often associated with the coloured powders that end up coating its participants after they’ve thrown them at each other. But this is just one part of Holi, which is split into two events: Holika Dahan and Rangwali Holi.

8-Gulal-is-available-in-various-colours...-1440x960Picture credit: Internet

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Holika Dahan takes place the night before Rangwali Holi. Wood and dung-cakes are burned in a symbolic pyre to signify good defeating evil (in Hindu Vedi scriptures, the God Vishnu helps burn the devil Holika to death).

The next morning, people gather in public spaces and take part in Rangwali Holi. This is a raucous affair where people chase each other around, throwing handfuls of coloured powders (known as gulal) at one another while getting drenched in water.

May God give you all the colors of life, colors of joy, colors of happiness, colors of friendship, colors of love and all other colors you want to paint in your life. 

Happy Holi friends.🎉🎉🎉

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कविता

Prayer

adult-background-backlit-1615776~2-2.jpgPicture credit: Internet

“मुझे भी सिखा दो”

ऐ ख़ुदा!
मुझे भी सिखा दो, अब और नहीं रहा जाता,
उनके ज़ज़्बे को देख, शिथिल नहीं बहा जाता,

मैं भी उन-सा ही हूँ, फिर भी पीछे रह जाता हूँ,
वे ऊपर उठे जाते हैं, मैं नीचे ही रह जाता हूँ,

यह दर्द-ए-हिज़ाब और नहीं सहा जाता,
मुझे भी सिखा दो, अब और नहीं रहा जाता।

मन की गरमाहट सब कुछ तो करना चाहती हैं,
हौसलों की ज़ागीर लिए बेख़ौफ़ उड़ना चाहती हैं,

अब अरमानों का शैलाब लिए और नहीं बहा जाता,
मुझे भी सिखा दो, अब और नहीं रहा जाता।

-vj

शब्दावली: सिथिल: मंद, हिज़ाब: शर्म

Translated:

Oh God!
Please bless me too, its impossible to stand more,
Seeing their spirit, I’m unable to get their score.

I am the same as others, yet I am left behind,
they rising up hook-crook & I stayed down spind.

Now the pain of modesty is no more enduring,
Please Lord bless me too, its impossible to lowering.

Warmth of mind wants to do everything,
& wants to fly fearlessly with the spirits of wing.

Now there is no more shedding of aspirations,
Please Lord bless me too, I losing my acceleration.

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शेर-ओ-शायरी

मच्छर

“रक्त का बीमार”

क़त्ल हुआ उस का, मेरे ही हाथों से,
नासमझ तिश्नगी में, रक्त का बीमार था।

-vj

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कविता

चाय

चाय, सबकी सुबह का एक सुनहरा नाम, भवनात्मक इकाई, छोटी सी प्याली में भरी हुई चुस्कियों की ढ़ेर, एहसासों का पिटारा।

चाय’

वो हल्की सी रंग में, हर मौसम का साथी,
हर नगर, हर डगर, हर प्रहर में मिल जाती,
शाम ढलती हो या फिर सुबह हो जाती,
अक़्सर हाथों में मिरी प्याली है आती,
वो हल्की सी रंग में, हर मौसम का साथी।

शब्दों की भीड़ में जब पास है आती,
थोड़ी से गुप्सुप में, आधी है हो जाती,
उतरकर गले से जब साँसों में खो जाती,
थोड़ी सी बचकर भी, पूरी की याद दिलाती,
वो हल्की सी रंग में, हर मौसम का साथी।

सफर में भी जब राही की याद है आती,
इक प्याली ही है जो हमसफ़र हो जाती,
यादों में भी जो भोज्य के काम है आती,
वो हल्की सी रंग में, हर मौसम का साथी।

कभी हल्की कभी मीठी कभी फीकी है हो जाती,
हर रूप, हर घूँट में, मुझको है रास आती,
चाहे थोड़ी हो या ज़्यादा, बस बातें हो बाकी,
वो हल्की सी रंग में, हर मौसम का साथी।

-vj

छवि श्रेय: साधक

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कविता

पिता

My father my motivation

पाता हूं जिनको मन-वन में,
तत् शीश वहीं झुकाता हूँ,
जिनकी छाया में पल-ढ़ल कर,
मम् परिभाषित हो पाता हूँ,
मनन-वचन जिनका कर मैं,
जीवन में सफलता लाता हूँ,
ऐसे परम् पूज्य हैं वो,
जिनका मैं पुत्र कहलाता हूँ।

जब होता आशाहीन कभी,
या फिर व्यथित हो जाता हूँ,
सत् पथ होकर भी जब,
पथ भ्रमित हो जाता हूँ,
तब जननी देती अभिलाषा,
और धैर्य जहाँ से लाता हूँ,
भ्रमित पथ का निराकरण,
तब पितृ ज्ञान से पाता हूँ,
ऐसे परम् पूज्य हैं वो,
जिनका गुणगान मैं गाता हूँ।

-vj

Father, you have always believed in me, more than I even believe in myself, thanks for your words of encouragement, you made me who I am today. Your love, care, and support are priceless to me. Father is the greatest gift of Lord all over the world. Show and give proper respect and time to your parents. They are living Lord for us. Thanks everyone, for your time and attention!

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