Always think forward

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“सोच सदा आगे की रख”

सोच सदा आगे की रख,
पीछे का तो सब बीत गया,
ग़र हुआ नहीं ऐसा इस बार,
समझो फिर से कोई जीत गया।

धीमी ही तूने चाल रखी,
आगे निकल तेरा मीत गया,
वो खुशी के गाता गीत गया,
तिरा इक सपना फिर अतीत भया।

हाथों में तिरे कुछ न लगा,
वह फिर से दुःखातीत भया।

अब वक़त हुआ आशातीत बन,
कुछ ऐसा नहीं जो छूट गया,
सोच सदा आगे की रख,
पीछे का तो सब बीत गया।

-vj

Translated:

Always keep thinking ahead,
everything behind us has been passed,
if you will not do best this time,
you must think that someone has won again.

Your every move was too slow,
that’s why your fellow has overtaken you.
He sang the songs of happiness,
& your happiness became dream again.

You get nothing in your hands,
and he felt the happiness again.

Now its time to be hopefulness,
you still have the the chance to get.
Always keep thinking ahead,
everything behind us has been passed.

पास बुलाओ.. Encouragement

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“जुनूँ से पूछो था कहां”

उस जुनूँ से पूछो था कहां,
थोड़ी डाँट लगाओ, पास बुलाओ।
गुफ़्तुगू की ग़र हो ख़्वाईश,
ज़मीर का पता लगाओ, पास बैठाओ।

सुकूँ को चैन से रहने न दो,
सुकूँ को बंधक बनाओ, पास बुलाओ।
बारिशों की चाहत लिए न बैठो,
ज़मीं में सुरंग कराओ, प्यास बुझाओ।

अँधेरी रातों में उजाले न ढूढों,
बस इक दीप जलाओ, प्रकाश फैलाओ।
अभी सफर बहोत है लंबा, छाले न देखो,
कदम बढ़ाओ, मंज़िल तक जाओ।

यूँ कब तक अल्फाज़ों को सुला के रखोगे,
ख़ामोशी हटाओ, लफ़्ज़ों को जगाओ।
कौन कहता है हार गए तुम,
उन्हें झूठा ठहराओ, प्रयास बढ़ाओ।

-vj

Translated:

Ask your passion where was it,
Scold a little, call nearby,
If you have a wish to communicate,
Find the conscience, tell it to sit nearby.

Do not let ‘relaxation’ rest in peace,
Make hostage of relaxation, call nearby,
Do not wait for the rains,
Make a tunnel in the ground, quench thirst.

Do not seek light on dark nights,
Just light up a lamp, spread the light.
Still the journey is too long, don’t see the blisters,
Step up, go to the destination.

How long will you put your words on the rest,
Remove the silence, wake up the words.
Who says that you have lost,
False them, increase the effort.

Have a great day ahead. Stay self-motivated.

दुविधा से निकल.. Keep trying

“तू गवां नहीं खूबसूरत पल”

बाधाओं की सोच लिए,
तन-मन की दुविधा से निकल,
बस ऐसे ही निखरेगा कल,
तू गवां नहीं खूबसूरत पल।

अब जग है धुंधला हो रहा,
हवा भी मट’मैला हो रहा,
नीर यहाँ निर्मल नहीं,
माटी भी उपजना छोड़ रहा।

तू क्यों आशायें तोड़ रहा,
पग पीछे है मोड़ रहा,
चिंतन से निकल, मंथन पर चल,
तू गवां नहीं खूबसूरत पल।

ग़मों का कोई बोझ नहीं,
खुशी भी आता रोज़ नहीं,
जो मिला वही बहोत यहां,
ख़तम करना कोई खोज़ नहीं।

पथिक है तू मुसाफ़िर भी,
नेक है तू और काफ़िर भी,
ख़्वाबों में टहल, असल में चल,
तू गवां नहीं खूबसूरत पल।

-vj

Translated:

To think of the obstacles,
Freaked out of the dilemma of body and mind,
Just like that tomorrow will flourish,
So do not destroy the beautiful today.

Now the world is getting blurred,
The wind is also getting dirty,
Water is not clean here,
& the soil also stopped growing.

Why are you breaking the hopes,
And steps are turning back,
Freaked out of the contemplation,
and go on brainstorming,
So do not destroy the beautiful today.

There is no burden of sorrow,
Happiness does not come everyday,
Everything is enough what we got here,
Never leave your journey incomplete.

You are a traveler, also a wanderer,
You are good and bad too,
Walk in the dreams, run in the reality.
So do not destroy the beautiful today.

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One step more..हौसला

“अंत का दौर नहीं आया

अभी तो शुरुआत है अंत का दौर नहीं आया,
वो कौन है जो गमों से लड़कर, खुशियाँ नहीं पाया,
अगर मुझमें है तो तुममें भी ज़रूर होगा,
जिसे ग़मों से लड़कर ही हारना मंजूर होगा,
जिसे ग़मों को हराकर ताड़ना मंजूर होगा,
ग़मों से जो डर जाये जब मुझमें नहीं तो तुममें भी नहीं,
हसरतों से मंज़िल भी झुका दे वो हौसला है तुमनें पाया।

कोई नहीं ऐसा जिसे खुशियों ने नहीं लुभाया,
कोई नहीं ऐसा जिसे हंसना न रास आया,
यह ग़म बड़ा ज़िद्दी है आता ज़ुरूर है,
कहीं ना कहीं घर अपना, बनाता ज़ुरूर है,
उस ख़ाली जगह को भी खुशियों से भरना होगा,
ग़म आये जब, उसे, फिर आने से डरना होगा,
बस खुशियों की आस में तुम सुकूँ की नींद मत सो जाओ,
यही वक़्त है जब थोड़ी खुशियों के लिए भी लड़ना होगा,
अभी तो शुरुआत है अंत का दौर नहीं आया,
वो कौन है जो गमों से लड़कर, खुशियाँ नहीं पाया।

-vj

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Translated:

It is just the beginning of life, the end has not come yet.
There is no one who did not get happiness by fighting with sorrow.
If i have that ability to fight then you also have the same.
Whom it would not be acceptable the happiness by fighting with sorrows.
Whom it would not be acceptable the happiness by beating with sorrows.
Who is scared of sorrow when it’s not in me then not in you.
You have got that strength so that you can beat the target.

No one in this earth who don’t know the wealth of happiness.
No one in the earth who don’t want the company of happiness.
This sorrow it too much stubborn always come when it get chance.
It makes home where it gets place inside you.
You have to fill that place with happiness. So that when sorrow come it would get no place to stay and the sorrow feel the sadness.
Just don’t sleep in the hope of happiness.
This is the time when you have to fight for some happiness too.

हौसला

“जीत सकते हो तुम”

उन मुश्किलों, उन हालातों से,
जग की लुभावनी बातों से,
अब्र और बरसातों से,
और आते-जाते ख़यालतों से,
जीत सकते हो तुम।

दुज़ों का होना, कोई डर नहीं,
जब तू बन रहा, निडर नहीं,
वह कौन है जो परेसां कर रहा,
रस्ता न कोई आसान कर रहा,
फिर भी फ़िज़ूली एहतिज़ाजों से,
जीत सकते हो तुम।

हार का कोई ग़म नहीं,
जीत का कोई अहम नहीं,
अदावत भी कुछ कम नहीं,
और जफ़ा हो रही ख़तम नहीं,
फिर भी ऐसी ज़ज़्बातों से,
जीत सकते हो तुम।

उठो औऱ जंग मोल लो,
ग़मों को ग्राम में तोल दो,
ख़ुशी के लफ़ज़ बोल दो,
थक-थक कर चलना छोड़ दो,
सिर्फ ऐसे ही..नगमातों से,
जीत सकते हो तुम।

-vj

अब्र- cloud, ख़यालत- thought, दुज़ों- stranger, परेसां- disturb, फ़िज़ूल- unnecessary, एहतिज़ाज़- objection, अदावत- enemy, जफ़ा- oppression, जज़्बात- feeling, नगमात- thought/mode

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चल पड़े हम

तैयारी बहोत अच्छी ना थी’

तैयारी बहोत अच्छी ना थी,
पर इरादा बेसक अच्छा था,
मंज़िल का ठिकाना ज्ञात तो था,
पर सफर के लिए अभी बच्चा था।

यूँ तो पग रस्तों को चूमना चाहते थे,
शीश भी हवा में झूमना चाहते थे,
पर वह क्या था जो मुझे रोक रहा था,
ऐसा तो कोई न था जो टोक रहा था।

हम भी क्या करते,
किस सोच में पड़ते,
क्या अपने ही ख़्वाबों से लड़ते?

ऐसे में फिर कुछ न समझा,
कुछ न बूझा…चल पड़ा मैं..
मंज़िल की ओर, पाने वो छोर,
इक ऐसा डोर, हो चारों ओर,
खुशियों का शोर,
कभी सांझ, कभी भोर,
कहीं हिरन, कहीं मोर,
कभी नरम, कभी कठोर।

क्या ऐसा सच में है होता?
सोच में था..
कल्पनायें ऐसी ही बना,
उसकी खोज़ में था..

सच कहूँ तो वह खोज़,
अब भी जारी है,
बस फर्क इतना-सा है,
इस बार फ़तह की तैयारी है।

-vj

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