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ख़्वाबदारी

Picture credit: साधक

“ख़्वाबदारी”

कल सुबह तक यह काली घटा छंट जायेगी,
आफ़ताब बर्क की सवारी कर फिर आयेगी।

पंक्षियों का फिर से चहचहाना होगा,
फूलों का फिर से महक जाना होगा।

गांव के बड़े बुजुर्गों का बाहर, आना होगा,
बस थोड़ी-थोड़ी दूर पर उनका, ठहठहाना होगा।

बच्चे भी फिर से स्कूल के लिए भाग रहे होंगे,
दादाजी अपनी चाय और अखबार माँग रहे होंगे,
माँ सबके लिए पराठे सेंक रही होगी,
पापा को भी ऑफिस जाने में देर हो रही होगी।

तब कहीं जा के शायद मेरे उठने की बारी आएगी,
इन्तिज़ार करो….
कल सुबह तक यह काली घटा छंट जायेगी।

मैं सब के कार्यों में तब थोड़ा-थोड़ा हस्तक्षेप करूंगा,
अपना शुरू हो न हो, सबका थोड़ा-थोड़ा लेट करूंगा,

अपनी तो गाड़ी ऐसे ही रोज़ चलती है,
वह कभी दौड़ती नहीं, खिसकती है, फिसलती है,
मैं इसी की सीट पर बैठ रोज़ सवारी किया करता हूँ,
सुबह से शाम तक ऐसे ही ख़्वाबदारी किया करता हूँ।

यूँही सांझ की रुत तब आँखों को सोना सिखायेगी,
हां, कल सुबह तक यह काली घटा फिर छंट जायेगी।

-vj

Enjoy your life at every moment:

Once a fisherman was sitting near seashore, under the shadow of a tree smoking his beedi. Suddenly a rich businessman passing by approached him and enquired as to why he was sitting under a tree smoking and not working. To this the poor fisherman replied that he had caught enough fishes for the day.

Hearing this the rich man got angry and said: Why don’t you catch more fishes instead of sitting in shadow wasting your time?

Fisherman asked: What would I do by catching more fishes?

Businessman: You could catch more fishes, sell them and earn more money, and buy a bigger boat.

Fisherman: What would I do then?

Businessman: You could go fishing in deep waters and catch even more fishes and earn even more money.

Fisherman: What would I do then?

Businessman: You could buy many boats and employ many people to work for you and earn even more money.

Fisherman: What would I do then?

Businessman: You could become a rich businessman like me.

Fisherman: What would I do then?

Businessman: You could then enjoy your life peacefully.

Fisherman: Isn’t that what I am doing now?

Moral – You don’t need to wait for tomorrow to be happy and enjoy your life. You don’t even need to be more rich, more powerful to enjoy life. LIFE is at this moment, enjoy it fully.

As some great men have said “My riches consist not in extent of my possessions but in the fewness of my wants”.

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नींद

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मेरी नींद को आदत मेरी, पसन्द आती नहीं

मेरी नींद को आदत मेरी, पसन्द आती नहीं,
मैं उसका दोस्त ही हूँ, समझ पाती नहीं,
समझाऊं उसे, इतना वक़्त तो मिलता नहीं,
बिन उसके चैन का कमल भी खिलता नहीं।

वो वक़्त से आती तो है, मैं टाल देता हूँ,
उसके हिस्से से भी, कुछ वक़्त निकाल लेता हूँ,

शिकायतें करे वो किससे, यह तो मेरी ही मनमानी है,
बस एक दो नहीं, न जाने कितनी सारी हैं,
यह आज की नहीं, सदियों की बीमारी है,
पर ख़्याल रखना उसका, मेरी ही ज़िम्मेदारी है।

हाँ सब कुछ समझता हूँ और जानता भी हूँ,
सुधारना चालू किया नहीं मैंने, मानता हूँ,
अब अपनी ही कमियों को छिपाऊँ किससे मैं,
अपनी मनमानियों का कारण भी पहचानता हूँ,
और उन मनमानियों का निराकरण भी जानता हूँ।

पर भूल जाता हूँ मैं, उसकी ख़्वाईशो को, खुद ही में लिप्त होकर,
वो पराई हो जाती है, किसी और की आँखों में खोकर।

हाँ वक़्त तेरे लिए भी है, मुझ से कहा जाता नहीं,
मैं कैसा भी रहूँ, तुझे कभी रूठना आता नहीं,
मुझे भी उतना ही इश्क़ है तुझसे, जितना तुझे है,
पर सुकूँ जो तुझमें है छुपा, मैं कहीं और पाता नहीं।

-vj

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प्रसन्नता

mark-adriane-mus2rrayruq-unsplash~31897108077957270491..jpgPicture credit: Internet

“खुशनुमा पल”

चलिए कुछ बात खुशनुमा पलों की करते हैं,
दर्द में बहोत हुई कलमें गीली,
आज़माईश आज-कल के लम्हों की करते हैं।

बीते कुछ दिनों में हुआ, कुछ ऐसा,
जिनका ज़िक्र करना ज़रूरी हो गया,
जैसे घने जंगल में, बहोत हो जानवर,
मैं इक अकेला कस्तूरी हो गया।

ऐसी ही कुछ अनुभूति मुझे भी हुई,
जब नए अक्सों से मिरा मिलन हुआ,
विचारों का मेल-जोल हुआ,
और शब्दों का सम्मिलन हुआ,
हाँ ऐसे ही मैं हिरण हुआ,
ग़मों का अस्त हुआ,
खुशियों का किरण हुआ,
बुरे का जाना हुआ,
अच्छे का सुमिरन हुआ।

अभी तो इस दौर की शुरुआत है,
आगे का कुछ सोचा नहीं,
खुशियों का चहचहाना हुआ,
ग़मों को पूछा नहीं,
यह रस्ता ले जाएगा कहाँ, पता नहीं,
अब इन लम्हों को सहेजने में भी कोई ख़ता नहीं।

अभी देखते हैं कहां तक जाना होगा,
पर इतना जानता हूँ, खूबसूरत नज़राना होगा,
यादों का तराना होगा, ख़्वाबों का आना होगा,
और ऐसे ही निर्माण मिरा आगे का आशियाना होगा।

-vj

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Downcast

20200218103220.jpgPicture credit: Internet

“देर तक देखते रहे”

सज़ा ही कुछ ऐसी मिली, देर तक देखते रहे,
अपनों का चले जाना हुआ, ग़म से आँख सेंकते रहे।

इफा का टूट जाना हुआ, आस खोजते रहे,
तिफ़ल का खिलखिलाना गया, अश्क़ पोछते रहे।

हम बे’आवाज़ हुए फिर से इक दफ़ा…..

शय का शय से खो जाना हुआ, हाथ फेरते रहे,
सज़ा ही कुछ ऐसी मिली, देर तक देखते रहे।

-vj

शब्दावली: इफा: वचन, तिफ़ल: बच्चा, शय: चीज़

Translated:

The punishment was something like this, kept watching for a long time,
We lost ours loved ones, kept on sobbing with sorrowed lime.

Promises are broke down, kept searching consolation,
There was a blossoming of baby and tears got cancellation.

We got lost again once again …..

The object is lost from the object, we become empty handed,
The punishment was something like this, kept watching for a long time.

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सोने दो

18-Things-People-Who-Love-To-Sleep-Truly-Understand7__880Picture credit: Internet

“सोने दो”

बंद हैं कमरे, अंधेरे हैं साथ, सोने दो,
उजाले तुम लाओ न साथ, सोने दो।

पलकें हैं झुकी, लगाओ न हाथ, सोने दो,
पास बैठो मग़र करो न बात, सोने दो।

ख़्वाबों के झगड़े फ़साद, होने दो,
करो सिर्फ सोने की बात उन्हें रोने दो।

मुझे इक दफ़ा फिर फ़ज़ाओं में खोने दो,
बंद हैं कमरे, अंधेरे हैं साथ, सोने दो।

ढल चुकी रात, ना कोई मुलाक़ात, होने दो,
आँखें हों बंद, बस मन में ही बात, होने दो।

इस रात, मुझे ऐसे ही ख़्यालात बोने दो,
बंद हैं कमरे, अंधेरे हैं साथ, सोने दो।

-vj

Sleeping is a great medicine of all the problems and it’s not injurious to our health. I love to sleep. When I feel bad, I take a nap. When I feel sad, I take a nap. when I am angry, I have a nap. I feel great after a nap. Powerful antidote of all the problems.

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Happy Women’s Day

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“एक स्त्री”

जब बच्चों की नादानियाँ न थम रहे हों,
बापू की डाँट से बचने को वो सहम रहे हों,
तब ममता की छाव लिए जो पास आये, एक स्त्री।

जब चंदू खूब शैतानियां ढा रहा हो,
अपने बंधु से ही हाथापाई कर आ रहा हो,
तब पड़ोस की आंटी से जो बचाये, एक स्त्री।

जब खिलौनों की मनसा मन ही मन उमड़ रही हो,
स्वाती अपने भाई से माँगने को लड़ रही हो,
तब इक खिलौना नया जो पास लाये, एक स्त्री।

जब स्कूल का कार्य अधूरा रह रहा हो,
मास्टर रोज़-रोज़ शिकायतें कर रहा हो,
तब एक अध्यापिका जो घर-घर हम पाएं, एक स्त्री।

जब राखी का पर्व मिठाईयां ला रहा हो,
चंदू, स्वाती से स्नेह बंधवा रहा हो,
तब उसे फ़र्ज़ का पाठ जो पढ़ाये, एक स्त्री।

जब चंदू जवानी का पायदान चढ़ रहा हो,
और लड़का-लड़की में फर्क समझ रहा हो,
तब दोनों को एक समान बता जो आदर सिखाये, एक स्त्री।

-vj

Translated:

When the naughtiness of children are not stopping,
and they are afraid of father’s shouting,
then who provides the shelter of endearment, A woman.

When Chandu is casting a lot of mischiefs,
and comes after fighting with his colleagues,
then who saves us from their neighborhoods. A woman.

When the wishes of toys are overflowing,
and Swati is fighting for those toys to playing,
then who bought a new toy for playing, A woman.

When school work is being incomplete,
& master is complaining every day of the cheat,
then we get a teacher from house to house, A woman.

When the festival of Rakhi is bringing sweets,
Chandu is getting love of sister’s esteems.
then who teaches him a lesson of honor. A woman.

When Chandu is getting the stages of youth,
& not understanding the similarities of truth,
then who teaches the importance of a girl, A woman.

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Self Encouragement

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नया किरदार”

पुराने किरदार से निकल,
तू नए किरदार में ढल जाना,
तन्हाई में ना खोकर,
आशाओं में टहल आना।

गरीबों की महफ़िल में जाकर,
अमीरी का पता लगाना,
वो कैसे खुश रहते है वहां,
ज़रा हमें भी बताना।

तकलीफों की किल्लत किन्हें नहीं,
सब्र की महफ़िल सजाना,
यह कदम फ़रेबी हो ना जाएं,
हौसलों से इन्हें बढ़ाना।

अंजाम-ए-वफ़ा का दौर भी, आता है,
कभी-कभी,
यूँ अश्कों में ना डूब जाना……
मुअस्सर-ए-तस्कीन रूह को हो,
एहतिज़ाज़ न करना, मुस्कुराना।

क्या कहेगा ज़माना, क्या समझेगा ज़माना,
यह सब भूल जाना…
डर किस बात का, ए’तिमाद बरत,
आसिफ़ है तू, खुद ही को समझाना।

पुराने किरदार से निकल,
तू नए किरदार में ढल जाना,
तन्हाई में ना खोकर,
आशाओं में टहल आना।

-vj

शब्दावली: फ़रेब: छल, तास्किन: तसल्ली, एहतिज़ाज़: आपत्ति, एतिमाद: भरोसा, आसिफ: निपुुुण

Translated:

Out of the old character,
You get into a new character,
Never fell in the loneliness,
Stroll in hopes of victor.

Go to the cities of poors,
Find the richness of their hearts,
How are they happy there,
Please tell us the purity of that birds.

Who is free from the problems here,
Just have the greeting of the patience.
These steps should not be a fraud,
encourage them with flag of convenience.

the phase of sadness also comes, sometimes,
Don’t get drowned in tears …
The time of happiness is not away from you,
these are just the days of golden years.

What will the world say,
what will the world think, forget it all …
What are you afraid of!
You are a best learner, convince yourself.

Out of the old character,
You get into a new character,
Don’t lose in the loneliness,
Stroll in hopes of victor.

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Prayer

adult-background-backlit-1615776~2-2.jpgPicture credit: Internet

“मुझे भी सिखा दो”

ऐ ख़ुदा!
मुझे भी सिखा दो, अब और नहीं रहा जाता,
उनके ज़ज़्बे को देख, शिथिल नहीं बहा जाता,

मैं भी उन-सा ही हूँ, फिर भी पीछे रह जाता हूँ,
वे ऊपर उठे जाते हैं, मैं नीचे ही रह जाता हूँ,

यह दर्द-ए-हिज़ाब और नहीं सहा जाता,
मुझे भी सिखा दो, अब और नहीं रहा जाता।

मन की गरमाहट सब कुछ तो करना चाहती हैं,
हौसलों की ज़ागीर लिए बेख़ौफ़ उड़ना चाहती हैं,

अब अरमानों का शैलाब लिए और नहीं बहा जाता,
मुझे भी सिखा दो, अब और नहीं रहा जाता।

-vj

शब्दावली: सिथिल: मंद, हिज़ाब: शर्म

Translated:

Oh God!
Please bless me too, its impossible to stand more,
Seeing their spirit, I’m unable to get their score.

I am the same as others, yet I am left behind,
they rising up hook-crook & I stayed down spind.

Now the pain of modesty is no more enduring,
Please Lord bless me too, its impossible to lowering.

Warmth of mind wants to do everything,
& wants to fly fearlessly with the spirits of wing.

Now there is no more shedding of aspirations,
Please Lord bless me too, I losing my acceleration.

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Disappointment

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“कहां जाऊं”

बड़ी हुज़ूम है यहां, राहत कहां से लाऊं,
दुनिया अपनी ही छोड़ मैं, औऱ कहां जाऊं।

ना ही अश्क़ बहा पाऊं, ना ही इसे छिपा पाऊं,
यह रूह है धधक रहा, इसे कैसे बहलाऊँ।

सामने ही है दरिया, कैसे पार लगाऊं,
ना नौका ही खे पाऊं, ना ही पतवार हो पाऊं।

यह दर्द है कि बढ़ रहा, मरहम कहां से लाऊं,
बाजार में है सौ दवे, कौन-सा लगाऊं।

रोज़-ए-इंतज़ार यहां, सहा नहीं जाता,
फरकत-ए-ग़म की वीरानियाँ, मैं किसको सुनाऊं।

यह इल्तिज़ा मिरी, ऐ ख़ुदा, ग़ौर तो फ़रमा,
इस बेजुबां शहर में, मैं अब किस को मनाऊं।

-vj

Translated:

It’s too crowd here, from where i bring relief,
After leaving the world of my own, where I love to freeze.

Neither should I shed any tear, nor hide it,
This spirit is burning now, how to wide it.

The river is in front of me, how would i cross it,
Neither the boat nor the rudder could i be a bit.

It is the pain that are increasing, from where I get ointment,
There are hundred daves in the market, which should I put.

the waiting of everyday is hard to pass,
the story of worries, to whom should I tell at last.

This is the prayer to you Hey Lord, listen to please,
In this beleaguered city, to whom I appease.

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Separation

20200303135623Picture credit: Internet

“अपना कहकर”

हम वक़त बढ़ा सकते थे,
इक दूजे को अपना कहकर,

कुछ लफ़ज़ बढ़ा सकते थे,
इक दूजे को अपना कहकर,

तलब हुई इतनी मुझको,
भूल ही गए जैसे खुद को,

दीवानों सा अहवाल हुआ,
वो छोड़ चले सपना कहकर।

हम रात रागिनी ला न सके,
खुशियों को भी अपना न सके,

मन डूब गया ऐसे कश्मकश में,
कुछ भी हम समझा न सके,

कैद हुई हो बर्क जैसे,
खुर्शीद से अक़्सर तन्हा रहकर,

दीवानों सा अहवाल हुआ,
वो छोड़ चले सपना कहकर।

-vj

शब्दावली: तलब- इच्छा, अहवाल: हालात, बर्क: बादल, खुर्शीद: सूरज

Translated:

We could increase the time,
by giving everything to each other,
We could increase the words,
by saying everything to each other.

It Summoned me as much,
that i forgot everything.
I become mad in her love and,
she left me, saying you are dreaming.

We couldn’t bring the happiness of night,
We couldn’t enjoy the moments of bright.

mind got drowned in such a struggle,
we couldn’t explain anything.
Clouds are imprisoned,
in the way that sun got itself missing.
I because mad in her love the way,
that i forgot myself everything..