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कविता

Sleeping.. Sleeping

Picture credit: Internet

“निद्रा”

जब थकावट में सदियों की निद्रा पास आती है,
सर हवाओं में झूमकर, बिस्तर की याद दिलाती है,
आँख अंधेरे में खोकर सब कुछ भूल जाता है,
तन को तब सिर्फ, सोने में मजा आता है।

मैं बत्तियाँ बुझाया या नहीं कहाँ सोचता हूँ,
बिस्तर भी लगाया या नहीं कहाँ खोजता हूँ,
ये सभी न जाने किस अंधेरे में खो जाती हैं,
वो कुर्सियां वो टेबल मेरा बिस्तर हो जाती हैं।

तब वो चैन और सुकूँ, मैं सोकर ही पाता हूं,
जिन्हें ढूढ़ने मैं, जग कर ही लग जाता हूँ,
यूँ उठ जाने पर सुकूँ फिर कहाँ रास आती है,
जो थकावट में सदियों की निद्रा पास लाती है।

-vj

Translated:

When centuries of sleep come to exhaustion,
the head reminds me about the bed, swinging in the wind,
eye forgets everything to lost in the darkness,
then the body enjoys only sleeping.

I do not think about the lights, they are extinguished or not,
i do not find the bed, it’s near to me or not,
they all get lost in the unknown darkness,
Those chairs, those tables became my bed at then.

Then that relax and patience, i get via. sleeping,
whom i need to find after awakening,
after waking up, it’s not necessary we will get happiness or not,
which brings centuries of sleep in exhaustion.

:Sleeping is the best gift of Lord.

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कविता

यादों की बातें… Dreaming the reality

Picture credit: Internet

“यादों की बातें”

न ज़माने को ज़माना पसन्द आता है,
ना ही नींद को, सो जाना पसन्द आता है,
वह जो पसन्द आता है, बिन बुलाये आता है,
कभी लबों पर तो कभी रूह में बस जाता हैं।

बात अलग है…..वह खो जाता है,
बस ख़्वाबों में ही, अपना हो पाता है,
क्या ख़बर उसे.. ऐसे में क्या-क्या हो जाता है,
जब इंतिज़ार में कोई शख्स, अक़्स हो जाता है।

फर्क बस इतना-सा है…
किसी को अकेलापन भाता है,
किसी को, किसी का साथ होना रास आता है।

कम्बख़त यह मन…. बस थोड़ी-सी आस जगाता है,
फिर कहीं दूर चला जाता है,
सिर्फ इतना ही नहीं…साथ-साथ अपने,
जो दिया है होता…वह भी साथ ले जाता है।

ऐसे में वक़्त कहां गुज़र पाता है,
जब वह वक़्त-बे’वक़्त याद आता है,
इक शख्स फिर, जमाने से दूर हो जाता है,
वह खामोशियों में मसरूफ़ हो जाता है।

क्या पता फिर कब मुस्कुराता है,
क्या पता कब तस्कीन हाथ लगाता है।

यहां तो…
जो पसन्द आता है बिन बुलाये आता है,
कभी लबों पर तो कभी रूह में बस जाता हैं।

-vj

शब्दकोश:

अक़्स– निशान, मसरूफ़– संलग्न, तस्कीन– तसल्ली

Translated:

Neither world likes the world,
Neither sleep, likes to sleep,
The one who loves us, comes without calling,
those people sometimes makes place in the heart and sometimes they become our breath.

It is different thing that we loose those feelings soon,
and we get them close just in dreams,
he don’t know anything, what happens in such a situation,
when a person became a sign in waiting.

The only difference is …
Someone likes loneliness,
Someone likes to be with someone.

Well, this mind ….
awakens hope just for few moments,
then goes away somewhere,
not only that… together with itself,
whatever it has given … he also takes away.

in such a moment, it’s hard to pass time.,
when we remember them time and time again,
one person then, gets away from the world,
then he falls in the silence and loves to stay there.

who knows when he smiles,
who knows when he meets the comfort,

Here it is…
The one who loves us, comes without calling,
those people sometimes makes place in the heart and    sometimes they become our breath.

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ग़ज़ल

Dream…अधूरे ख़्वाब

“ख़्वाबों में खोकर”

ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया,
हुआ कुछ ऐसा हर दफ़ा मेरे साथ कि बच न पाया।

मैं गुमराह न था, मैं तो हर रस्ते का पता जानता था,
अंधेरे में खड़े हर शख्स का चेहरा पहचानता था,

फर्क बस था इतना, सुकूँ का कोई ख़त न आया,
ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया।

था निकला मैं भी, इक मकां से इक मकां पाने के लिए,
आँखें खोलकर सचमुच का महल बनाने के लिए,

किसने था टोक दिया रस्ते में, मैंने कोई छत न पाया,
ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया।

अभी भी जानता हूँ जो सोचता हूँ, सब पा लूंगा,
पूरा नहीं तो अधूरा ही सही, अपना नसीब आजमा लूंगा,

वक़्त गुज़रता रहा मग़र इक कतरा भी रच न पाया,
ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट

Translated:

No one gets happiness being lost in the dreams,
Something happened to me all the time that I could not escape from them.

I was not misled, I knew the address of every road,
I know the face of every person standing in the dark.

The only difference was that I got no letter of happiness,
No one gets happiness being lost in the dreams.

I turned out to get one aim leaving one aim,
I wanted to build a true palace with open eyes.

Who had stopped me, on the way, I found no roof of happiness,
No one gets happiness being lost in the dreams.

I still know what I think, I will get that thing soon,
Either complete or incomplete, I will surely try my luck.

Time passed, I couldn’t built a brick of dream.
No one gets happiness being lost in the dreams.

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शेर-ओ-शायरी

नाम

“ख़्वाईश”

अपनी ख्वाइशों की दुनियां को,
सरे-आम, नीलाम कर दूँ,

सोचता हूँ,..
मुक़म्मल होने से पहले,
इक पन्ने पर, ख़ुद का नाम कर लूँ।   

-vj

मुक़म्मल- die, नीलाम- sell

छवि श्रेय: इंटरनेट

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कविता

डर लगता है

साधक🚶

“ख़्वाब”

अब ख़्वाबों के शहर में जाने से डर लगता है,
वह ख़्वाब नहीं, मुसीबतों का घर लगता है।

हर रोज़ इक ख़्वाब मुसीबत बनकर है आ जाता,
अपनी मीठी बातों से अक्सर है बहलाता-फुसलाता,
बुरे मंज़र को कभी ज़ाहिर होने नहीं देता,
हसरतें बढ़ जाये बस वैसे ही है ख़्वाब दिखलाता।

वह खुशियों का नहीं ग़मों का लहर लगता है,
अब ख़्वाबों के शहर में जाने से डर लगता है।

नींद को मिरे शर्त मानकर चला आता है,
शायद ऐसे ही घूमने में वह मजा पाता है,
दरवाज़े खोले हैं हमनें, महताब से गुफ़्तगू करने को,
वह इसी मौक़े का अक्सर फ़ायदा उठाता है।

ऐसे ही मुसीबतों का कहर रात-भर रहता है,
अब ख़्वाबों के शहर में जाने से डर लगता है।

-vj

महताब- moon, गुफ़्तगू- conversation, मिरे- mine

छवि श्रेय: बहना

Every dream is not as beautiful as we think, every dream is not as pleasant as it looks. Dreams are just dream, it’s a beautiful lie.