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कविता

मकरसंक्रांति

उमंग की पतंग उड़ाने का वक़्त है,
धनु से मकर राशि में जाने का वक़्त है,
नई फसलों को भोग लगाने का वक़्त है,
जला के तिल वायु महकाने का वक़्त है,
कहीं पोंगल, कहीं बिहु, कहीं माघी है कहते,
यही खिचड़ी का भी उत्सव मनाने का वक़्त है।

आज से दिन और गर्मी का पारा चढ़ेगा,
जनउत्सव है ये जन का नारा चढ़ेगा,
सर्वत्र शुभत्व का लौ होगा प्रकाशित,
संक्रांत होगा मकर जब तारा चढ़ेगा,
यही समरसता, समता याद कराने का वक़्त है,
आज खुशियों का भी उत्सव मनाने का वक़्त है।