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शेर-ओ-शायरी

हौसला

Self-motivation is the force that keeps pushing us to go on, it’s our internal drive to achieve, produce, develop, and keep moving forward. When you think you’re ready to quit something, or you just don’t know how to start or something that pretends you to do anything, your self-motivation is what pushes you to go on. Believe yourself and step on.

जब सताने लगे तन्हाई, खुद का साथ पकड़ लिया करो,
दीवारों का हाथ थामकर, उनसे बात कर लिया करो,
यह मायूसी कहीं खो जाएगी देख लोगे तब,
दीवारों की तन्हाई से हाथ सेंक लोगे जब।

vj

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कविता

माँ के किस्से

Everyone needs their mom. Don’t get me wrong, fathers are important too. But mothers, mothers are the best gift the world has ever given us. They are not only our creators, but our teachers, our mentors. And best of all our best friends, even when we slam the door in their faces and we yell so loud that it must come up from our toes. Mother’s are essential for growth. Without her I would be lost and wandering around like a comet through space. Crashing and burning on my way. Through every year and every single laugh they are by our sides. I would not have survived the cards life has dealt me without her support and words of wisdom. Thank your mother every day.

हमनें मुस्कुराना भी उधार, पाया हो जिससे, 
उन्हीं से बचपन में हमनें, सीखें हैं क़िस्से।

लफ्ज़ टूटते हों या फिर लड़खड़ा गई हो,
पर भूलते-भुलाते जुबां पर आ गई हो,

आज भूलकर उन्हें हम, यादों में लगे किसके!
अपनी भी रोटियों में जिसने, बनाये हमारे हिस्से।

माँ बीच-बीच में अक्सर याद दिला दिया करती थी,
सामने आंटी के जब पोयम सुनाने, बुला लिया करती थी।

आज उन्हीं के सिखाये बोलियों के, हम गा रहें हिस्से,
हमनें मुस्कुराना भी उधार, पाया हो जिससे,

जब खेलने को मिरा घर ही जहां होता था,
हम खेलते थे जिससे वह समां, यहां-वहां होता था।

उसने ऐसे ही ज़हन में, बनाये न जाने कितने किस्से,
हमनें मुस्कुराना भी उधार, पाया हो जिससे।

vj

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शेर-ओ-शायरी

हौसला

Stay self motivated 🚶

कितना दम ख़म है बचा मुझमें वो दिखाना है,
आज के वक्त में खुद को भूल रहा जमाना है,
है बाकी दरिया में पानी अब भी ख़त्म नहीं हुआ,
सांस छूटने से पहले आसमाँ को गले लगाना है।

-vj

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शेर-ओ-शायरी

धैर्य

This is the time for few moments, don’t leave your company. In these few moments a new tomorrow will be created. Your patience starts with you and ends with you. Be the best friend of yourself. Stay self motivated.

जब हौसले टूटने लगे या फिर छूटने लगे,
आप अकेले रह जाओ और मुक़द्दर भी रूठने लगे,
तब आस मत तोड़ो और पाँव मत मोड़ो,
यह वक़्त है कुछ पल का, अपना ही साथ मत छोड़ो,
इन्हीं कुछ पल में एक नया कल बन जॉएगा,
या फिर आस छोड़ने पर अच्छा वक़्त निकल जॉएगा।। 

-vj

चित्र श्रेय: इंटरनेट

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कविता

मंज़िल का ठिकाना

“Choose your path”

ठिकाना पूछ कर बैठा हूँ वहाँ जाने के लिए,
फासले भूल कर नजदीकियाँ बढ़ाने के लिए।

हाँ वाकिफ़ हूँ मैं, रंजिशों से, जो वहाँ पर हैं पड़ी,
मैं डरता नहीं कभी क्योंकि ख्वाइशें मेरी बड़ी,

चुन रखा है जब, हर दम भी लगाऊंगा पाने के लिए,
ठिकाना पूछ कर बैठा हूँ वहाँ जाने के लिए।

बहुत भीड़ है यहाँ, हर कोई भागने में लगा है,
कोई पाता है यहाँ और कोई मांगने में लगा है,

वक़्त कर रहा ज़ाया खुद को और भगाने के लिए,
ठिकाना पूछ कर बैठा हूँ, वहाँ जाने के लिए।

औरों ने मुश्किलें बहोत सारी गिना रक्खी हैं,
उनके लफ़्ज़ों को मैंने परेशानी बना रक्खी हैं,

इक ख़त्म हूँ करता, दुज़ी तैयार होती सताने के लिए,
ठिकाना पूछ कर बैठा हूँ, वहाँ जाने के लिए। 

-vj

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कविता

किसके साथ गुज़ारे शाम

Enjoy your own company.

सुबह की धूप भी उनके नाम,
रात का अंधेरा भी ना आया काम,
क्या थी ख़ता जो रह गये अकेले,
अब किसके साथ गुज़ारे शाम।

हाथों में भी, ना रक्खे ज़ाम,
ना दिन को सुकूँ, न रात को आराम,
यूँ फ़िज़ूल में ही, हम हो गए बदनाम,
अब किसके साथ गुज़ारे शाम।

-vj

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शेर-ओ-शायरी

प्रतिस्पर्धा

वक़्त चल पड़ा है बिन पहिये के आगे,
जितनी तेज मैं भागूँ, उससे भी तेज यह भागे,
कहावतें हैं, वक्त के साथ चल, सफलता रास आएगी,
लालच की आश में, कोई 12 बजे सोये कोई 12 बजे जागे।

-vj

“ज़िन्दगी की दौड़ में अंततः कोई नहीं जीतता”

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शेर-ओ-शायरी

कर्म

हमें रूबरू होना है जिससे, वो वक़्त ही तो है,
किसे ख़बर, क्या पास लाएगी,
हमारे कर्मों का पहिया अभी जंग नहीं खाया,
खुशियां थोड़ी ही सही, पर रास आएगी।

-vj

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कविता

ग़म की उधारी

सोचता हूँ किसी का ग़म उधार ले लूं,
जब लेना ही है तो एक नहीं दो चार ले लूं,
सोचता हूँ किसी का ग़म उधार ले लूं।

उधारी मिलती नहीं मुझे, कभी घर पर,
चाहे हो, ग़म के चांद-सितारे सर पर,
खुद चाहे मुसीबतों से, कितनी ही बार खेलूं,
सोचता हूँ किसी का ग़म उधार ले लूं।

इस ग़म ने महफ़िल में लुटाये जज़्बात बहोत हैं,
ख़ामोशी ने भी तोड़े यहाँ नग्मात बहोत हैं,
ऐसे ही तो बीत गए बरसात बहोत हैं,
जो ग़म में हों बीते, इक रात बहोत है,
अब दूजों के परिंदों से, मैं भी तो इक बार खेलूं,
सोचता हूँ किसी का ग़म उधार ले लूं।

चमन की खुशियों से ग़म को इक मुलाकात दे दूँ,
चैन से सोने को, किसी सख़्स को इक रात दे दूँ,
आज गोद मैं, ग़म के सारे लम्हात ले लूं,
सोचता हूँ किसी का ग़म उधार ले लूं।

-vj

चित्र श्रेय: इंटरनेट

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कविता

सम्हाल कर आ

ज़रा धीरे ही चल इतनी ज़ोर से न आ,
जिस ओर से था आता, उस ओर से न आ,
हवायें भी बैठीं ख़ामोश, तुझे सुनने के लिए,
ज़रा आहिस्ता ही चल, इतनी शोर से न आ।

रात जो न गुज़र रहा, उसे भी गुज़ारना है अब,
इक सुबह फिर से पास बुलाना है अब,
यूँ छिपते-छिपाते किसी छोर से न आ,
जिस ओर से था आता, उस ओर से न आ।

उस मोड़ के माना अफ़साने बहोत हैं,
ऐ रहगुज़र उस मोड़ के जाने-पहचाने बहोत हैं,
इक इल्म बचाने को, उस मोड़ से न आ,
जिस ओर से था आता, उस ओर से न आ।

-vj

चित्र श्रेय: इंटरनेट