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ग़ज़ल

आहट भी ना हुई

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“लौट चले हम”

आहट भी ना हुई और लौट चले हम,
कहीं रहे अकेले तुम, कहीं रहे अकेले हम।

यह कैसा हुआ अहवाल, दर्द भी ना हुआ कम,
तुम्हारा भी बढ़ा गम, हमारा भी बढ़ा गम।

अब किसे सुनाए हम, रस्म-ए-जुदाई का गम,
बस एक ही था मरहम, वो भी हुआ ख़तम।

चाहे रहा हो वह हमदम या फिर रहा हो मिरा सनम,
पर साथ चले थे हम, अब वक़त हुआ बे’रहम।

क्या ख़ता हुई हमसे, रूठ गया मोह’तरम,
इन ज़ख्मों पर मिरी, अब कौन लगाए मरहम।

काश! ख़ुदा ही खाता रहम… गम ना सहते हम,
हम हँसते जनम-जनम, वो भी हँसते जनम-जनम।

-vj

शब्दावली:

अहवाल: हालात, रस्म-ए-जुदाई- जुदाई के पल

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ग़ज़ल

Happened! हुआ क्या है?

पूछो हुआ क्या है?”

अग़र मुक़द्दर ही रूठ जाये, पूछो हुआ क्या है?
सफ़र में राही ही छूट जाये, पूछो हुआ क्या है?

दर्द तो छूटने और रूठने का सभी को है होता,
मन जब रोने की सजा पाये, पूछो हुआ क्या है?

यूँ तो कभी खाने से दुश्मनी नहीं किसी की,
मन जब भूखा ही रहने में मजा पाये, पूछो हुआ क्या है?

आज हर ख़्वाब जो अपने से हैं लगते,
कल इक ख़्वाब जब हाथ छुड़ाये, पूछो हुआ क्या है?

ये मुस्कुराते चेहरे किस को हँसी नहीं देते,
जो इक मुरझाया मुखड़ा ना भूल पाये, पूछो हुआ क्या है?

चंद बूंदों से ही कलियां हैं फूल बन जाया करतीं,
हज़ार बूंदों से भी जब कलियां ना खिल पाये, पूछो हुआ क्या है?

जिन्हें गैरों की दुश्मनी भी अपनी है लगती,
ग़र उसे अपना ही ना रास आये, पूछो हुआ क्या है?

संग जिस के सफर में आनंद हो आता,
हम-सफर वो जब साथ छोड़ जाये, पूछो हुआ क्या है?

-vj

Translated:


If destiny stopped responding you, ask yourself what was your fault?
If your fellow traveler left you alone, ask yourself what was your fault?

Everyone has the pain of kittle and breaking,
When feeling gets the punishment of crying, ask yourself what was your fault?

As we know, In this world every person loves to eat,
When the mind enjoys being hungry a day, ask yourself what was your fault?

Today every dream seems to be fulfilled,
Tomorrow when a dream starts being fade away, ask yourself what was your fault?

Who loves to see these smiling faces,
If he couldn’t forget a sad face a day, ask yourself what was your fault?

Only a few drops are necessary for buds to be flower,
When the buds do not bloom even with a thousand drops,
ask yourself what was your fault?

Those who feels happiness towards their enemies,
If he does not like any one his own a day, ask yourself what was your fault?

With whose journey finds pleasure,
When he does not likes your company, ask yourself what was your fault?

छवि श्रेय: इंटरनेट

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ग़ज़ल

Dream…अधूरे ख़्वाब

“ख़्वाबों में खोकर”

ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया,
हुआ कुछ ऐसा हर दफ़ा मेरे साथ कि बच न पाया।

मैं गुमराह न था, मैं तो हर रस्ते का पता जानता था,
अंधेरे में खड़े हर शख्स का चेहरा पहचानता था,

फर्क बस था इतना, सुकूँ का कोई ख़त न आया,
ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया।

था निकला मैं भी, इक मकां से इक मकां पाने के लिए,
आँखें खोलकर सचमुच का महल बनाने के लिए,

किसने था टोक दिया रस्ते में, मैंने कोई छत न पाया,
ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया।

अभी भी जानता हूँ जो सोचता हूँ, सब पा लूंगा,
पूरा नहीं तो अधूरा ही सही, अपना नसीब आजमा लूंगा,

वक़्त गुज़रता रहा मग़र इक कतरा भी रच न पाया,
ख़्वाबों में खोकर कभी भी कोई सच न पाया।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट

Translated:

No one gets happiness being lost in the dreams,
Something happened to me all the time that I could not escape from them.

I was not misled, I knew the address of every road,
I know the face of every person standing in the dark.

The only difference was that I got no letter of happiness,
No one gets happiness being lost in the dreams.

I turned out to get one aim leaving one aim,
I wanted to build a true palace with open eyes.

Who had stopped me, on the way, I found no roof of happiness,
No one gets happiness being lost in the dreams.

I still know what I think, I will get that thing soon,
Either complete or incomplete, I will surely try my luck.

Time passed, I couldn’t built a brick of dream.
No one gets happiness being lost in the dreams.

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ग़ज़ल

Time..ग़म के पल

Sadness is not a feeling, it’s an opportunity to remould the happiness.

“अभी ख़ुद को सम्हालो”

ना जरूरत को समझो, ना जरूरत को मानो,
यह वक़्त भी गुज़र जाएगा, अभी ख़ुद को सम्हालो।


थक गया ग़र मुसाफ़िर तो सफर खत्म होगा नहीं,
आज की रात ज़रा-सा राहत फरमा लो।


यूँ ग़मों के ढ़ेर में खुशियाँ नज़र आती नहीं,
पुरानी यादों से तब तक महफ़िल तो सजा लो।


वैसे तो सोने से सिर्फ वक़्त ही गुज़रता है,
आज ग़म काटना है ज़रा नींदों को बुला लो।


ये रंजिशें सारी होती नहीं, दिल को दुखाने वाली,
यही सोच रंजिशों को अपना दोस्त बना लो।


ग़मों का कारवां है तो क्या, सुकूँ के लम्हें भी होंगे,
बीतना इसको भी है कल, अभी बस धैर्य आज़मा लो। 


दुःख भी थोड़े वक़्त का ही, होता है मुसाफ़िर,
हसीं वक़्त के संग, तुम इसको भी हँसा लो।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट

Translated:

Neither understood the need, nor accept the need,
This time will also pass, this time is too find relief.
The journey will not end if the traveler is tired,
So take a little relief tonight.
Though there is no happiness in the pile of sorrows,
Until then, decorate the memories with old memories.
By the way, time only goes by sleeping,
Today sorrow has to be cut down, just call the sleeping.
As always all these challenges are heartbreaking,
By thinking that make these challenges as your friend.
If there is a crowd of sorrows, then the moments of happiness also would be.
It has to go tomorrow also, just try patience now.
Sadness is also a traveler of few seconds,
With the laughter, fill the sadness with your happiness.

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ग़ज़ल

चुनौती स्वीकार है ताकि देश ज़िंदा रहें

It’s always great to love your country. This feeling can’t be written in the words, it can only be felt. Patriotism is a thing difficult to put into words. It is neither precisely an emotion nor an opinion, nor a mandate, but a state of mind, a reflection of our own personal sense of worth, and respect for our roots. Love of country plays an important role towards our nation. I am just showing my dedication for the nation that teaches me what is real love, how to love.

“Happy Republic Day”

चुनौती स्वीकार है हमें, ताकि देश ज़िंदा रहें,
मरे तो शान से मरे न मौत से शर्मिंदा रहें।

उठे शीश मिरा गर्व से हर बार वतन के लिए,
नाकाम इस ज़मी पर हर एक दरिंदा रहे।

लिखा जाए मिरा भी काम ऐ खुदा ऐसे लफ्ज़ों में,
सर-ज़मीं में जिसका नाम मुल्क़-ए-परिंदा रहे।

निकले जब भी लहू मेरा मैं ‘जय हिन्द’ ही गाऊँ,
ज़िस्म चला भी जाए मग़र रूह,मुल्क़-ए-हिंद में ज़िंदा रहे।

मैं परेसां करूँ हर एक नापाक चेहरे को इस’कदर,
कि मुक़म्मल हो उठे ग़र वो साज़िश-ए-शहर-ए-बाशिंदा रहे।

मांगता हूँ हिफाज़त उस पर-वर-दिगार से हर-बार,
दुआ-ओ-करम बरसा दे इतना कि हिन्दोस्तां ज़िंदा रहे।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट

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हौसला

आईने को साफ करो, तस्वीरों से बात करो,
छुप गया है इनमें आज कोई, वक़्त हुआ आज़ाद करो।

खुशियों के आलम को थोड़ी अदब और फुरसत दो,
ग़मों की गिनती में ना, कोई लम्हा बर्बाद करो।

जो तुम रह गए बंद कमरों में अकेले,
पास बैठो दीवारों के, थोड़ी गुफ्तगू करो, थोड़ी बात करो।

वक़्त गुज़र जायेगा वह भी, जिन्हें गुज़ारना है जल्दी,
हाथ बटाओ और काम उन्हीं का उनके साथ करो।

ये आँसूए बयान कर देंगी हकीकत तुम्हारी,
इक अल्फ़ाज़ भी फिसल न जाये, जुबां पे हाथ करो।

कब तक तुम अंधेरों का, यूँ करोगे इन्तिज़ार,
आज उजालों को सुलाकर खुद ही से एक रात करो।

-vj

चित्र श्रेय: इंटरनेट