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शेर-ओ-शायरी

ज़ख्म

कहते नहीं बनता ऐसा वो मंज़र लगता है,
ज़ख्म जब बाहर नहीं, अंदर लगता है।

-vj

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कविता

जाओ उस पार कभी

“poverty”

जाओ उस पार, कभी बस्ती में और देखो ज़रा करीब से,
तन सुलगता है, गर्मी में कैसे, पूछो उस गरीब से।

सर्दी में भी उस बंदे का, ऐसा ही कुछ हाल है होता,
हाथ-पांव ठिठुर हैं जाते और चेहरा पूरा लाल है होता,
हैं दौड़ाते पल बारिश के कैसे, पूछो उस बद-नसीब से,
जाओ उस पार, कभी बस्ती में और देखो ज़रा करीब से।

होने को इक चादर है होती, सर्दी-गर्मी-बरसातों में,
दिन भर काम-काज़ में आती, तन ढँकती है रातों में।
भोजन की टुकड़ी नहीं कोई, ख़्वाब हैं बस ख़यालतों में,
खाकर भूख तब तन है सोता, ऐसे मुश्किल हालातों में।

ज़रा बताओ हमें अब तुम, क्यों आ रहे ख़्याल अजीब से,
जाओ उस पार, कभी बस्ती में और देखो ज़रा करीब से।

-vj

We always like to see one side of the coins. Maybe the other side is not so adorable. Poverty is like another side of the coin. We also realize this only when we have less money for an essential item. But the other part of the coin feels it every day. How a single sheet helps in all the season. Their weather is terrible from there. To be honest, a hundred times from here.Think about their life well then you will know what the struggle is.


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शेर-ओ-शायरी

खड़े रहना

सितम कितना भी रहे, खड़े रहना,
ना डर के बैठना, ना पड़े रहना,
तेरा जुनूँ भी तुझसे है और मुक़द्दर भी,
हार जब हौसला घटाये, अड़े रहना।

-vj

No matter how hard the time is, you should stand, neither sit nor spun in fear. Your courage and your destiny both are in your hand. When the spirit starts breaking you, stay refrain as much you can.

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कविता

यह वह दौर

यह वो दौर है जहाँ हर शख्स पराया लगता है,
ग़ैरों का नहीं अपनों का सताया लगता है,
खुशियों का मात खाया लगता है,
ग़मों का गुदगुदाया लगता है।
वह बातों को अपनी…
लबों से नहीं,अश्कों से जताया करता है,
घुट-घुट कर भी मुस्कुराया करता है,
जैसे यह ग़म आज-कल का नहीं,बरसों का हो,
तुर्बत की बोझ को कंधे पर उठाया करता है।
क्या बताऊं…
वह भी इक दौर था,
शायद वह शख्स ही कोई और था,
जिसे सिर्फ मुस्कुराना रास आता था,
औरों को सताना इक अनोखा एहसास कराता था।
अब तो वह वक़्त सिर्फ ख़्वाबों खिलखिलाया करता है,
यह वो दौर है जहाँ हर शख्स पराया लगता है।

-vj

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शेर-ओ-शायरी

बचपन

बोल दो उन दरवाजों को चुप हो जायें, जो पुरानी हो चुकी हैं,
यूं खुरेदा ना करें, उन यादों को, जो बचपन की कहानी हो चुकी हैं,
मन मेरा आज भी वही ज़हान माँगता है, जीने के लिये,
वक़्त कानों में गूंज-कर कहता है, अब वो गाड़ी रवानी हो चुकी है।

-vj

Everyone wants to live childhood once again. This is the phase of life that everyone loves. Everyone wants it back. Hope in every stage of life, there may a medium through which childhood could be lived.

छवि श्रेय: साधक