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विचार

Happiness! Sadness!

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“आकांक्षाएं” सुख! दुःख!

सुख का पालन करते-करते हम भूल जाते हैं कि हम ग़मों का जनन भी कर रहे हैं। यह तो तभी ज्ञात होता है जब सुख अपने पथ से विमुख होने लगता है अर्थात हमें सुख की कमी का आभास होने लगता है। सच कहूँ तो यह आभास भी तब होता है जब हमारे सुख प्राप्ति की इच्छा प्रबल होने लगती है और वही सुख हमें दुख सा दृष्ट होने लगता है। इसे ही कहते हैं सुख के साथ-साथ दु:ख की अनुभूति।

क्यों न ऐसा सोचा जाए की सुख तो सुख है चाहे कम हो या ज़्यादा। कम या ज़्यादा उससे क्या लेना?

 जैसा कि हम जानते हैं कि जब कोई चीज़ तोलनीय होती है तो हम हमेशा ज़्यादा की आकांक्षा करते हैं और वो तो स्वाभाविक है क्योंकि हम उसके लिए कुछ मूल्य चुकाते हैं। तो क्या हम यह समझ लें कि हमनें यह सुख पाने के लिए इससे कहीं ज़्यादा दुख देखे हैं? हां ऐसा तो सबके मन में आता है। तब ही तो आकांक्षा इतनी प्रबल होती है सुख को लेकर।

मनुष्य एक ऐसे मायावी चक्र में है जहाँ उसे सुख या दुख किसी का मिलना ज़रूरी है। सच में ज़रूरी है या फिर हम सिर्फ ऐसा सोचते है?

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नहीं-नहीं इसका तो प्रचलन चला आ रहा है कि सुख और दुख दोनों एक के बाद एक आते हैं। अगर हमें इसका स्थाई समाधान चाइये, तो फिर हम ऐसा कर सकते हैं कि एक को पकड़ कर रख सकते हैं। चाहे वो दुःख हो या सुख। हम उसी के अनुसार परिस्थिति भी बना सकते हैं ताकि वो जाने ना पाये। कुछ तो हमसे गलतियां अवश्य हो रही हैं जो कि ये आते जाते रहते हैं। एक बार तो आये या गए नहीं, न जाने कितनी दफ़ा ऐसा हुआ है। फिर भी हम इस समस्या का निदान नहीं कर सके।

क्या इस पर सोचने की आवश्यकता नहीं? क्या इसका स्थाई समाधान आवश्यक नहीं? ज़रूर है, तो फिर कुछ इसके लिए भी किया जाय।

-vj

Translated:

By following happiness, we forget that we are also producing sorrows.  This is known only when happiness starts to diverge from its path, that is, we start feeling the lack of happiness.  To be honest, this feeling also happens when our desire to attain happiness starts to get stronger and the same happiness starts to be a sight for us.  It is called happiness as well as feeling of sorrow.

Why don’t we think that happiness is just happiness, whether it is less or more.  What to take more or less?

As we know that when something is weighed we always aspire for more and that is natural because we pay something for it.  So should we understand that we have seen more misery than this to get this happiness?  Yes, it comes in everyone’s mind.  Only then does aspiration prevail over happiness.

Man is in an elusive cycle where he needs to find happiness or sorrow.  Really necessary or do we just think so?

No – no, it is prevalent that both happiness and sorrow come one after the other.  If we want a permanent solution, then we can do it so that we can hold one.  Whether it is sadness or happiness.  We can also make the situation accordingly so that it is not known.  There are some mistakes that we keep coming.  Did not come once or did not know how many times this has happened.  Still we could not diagnose this problem.

Don’t need to think about it?  Is not a permanent solution necessary?  Sure, then something must be done for this as well.

Note: Please don’t think bad if you’re getting grammatical mistakes. I’m using the google translator for translating. Just try to understand what I want to express in my words.

Thanks for reading..

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शेर-ओ-शायरी

सफर और संगीत

A journey becomes great.. when we have a beautiful companymusic”.

इक धुन में निकल आये हम घर से,
और सारा सामान वहीं छोड़ आयें,
दिल, ज़ुबाँ, ज़ब्ज़ात, ख़यालत….
और न जाने, क्या-क्या तोड़ आयें।

-vj

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कविता

Body vs Mind

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“तन-मन का द्वेष”

मेरी उंगलियां भी कभी-कभी रुक जाती हैं,
ये पलकें भी कभी-कभी झुक जाती हैं,
मन तब भी रुकने का नाम नहीं लेता,
तन थक कर जब नींद को सम्मुख पाती है।

वह नींद से भी लड़ने को तैयार होता है,
वह आँखों पर नहीं मस्तिष्क पर सवार होता है,
अंततः जीत तो पाता नहीं उस से,
पर नींद को भी सहना तिरस्कार होता है।

वह जितना तन है थका होता, उतना सर भी थका देती है,
थकावट तो पास है होती, पर सोने कहाँ देती है,
इक दूजे से द्वेष कर दोनों इतने चूर हो गए होते हैं,
नींद पास है होती पर दूर हो गए होते हैं।

-vj

Translated:

Sometimes my fingers stop me to write,
sometimes these eyelids are also tilted to fight,
even the mind does not take the name of stopping,
when the tiredness of body, finds sleep in front of him.

He is also ready to fight with sleep,
He rides the brain, not eyes to sleep,
Eventually he could not win with it,
But the sleep has to suffer disdain so deep.

It makes the mind as sleepy as body was,
Exhaustion is near, but where does it allow him to sleep?
Both are fighting with each other to fulfill one’s need,
but sleep forgets itself how to asleep..

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शेर-ओ-शायरी

फ़रियाद

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ऐ खुदा! दो दुआ अगर तो याद भी रखना,
यूँ ही देख कर भूलने वाले बहूत हैं,
तेरे दर पर आया हूं, बहूत आस में हूं,
अब तो सफल हो जाऊं, वरना घूरने वाले बहूत हैं।

-vj

Translated:

Hey God!  If you are caring then please remember me always,
Here, in this world, there are many person who forget me easily,
I have came at your levee, I am very much in hope,
Let me be successful now, or there are many who judge me easily.

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कविता

Untold words.

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“नहीं लिखी मैंने”

जो बात पढ़ी जानी थी वो बात नहीं लिखी मैंने,
दरिया से जो टकराये वो बरसात नहीं लिखी मैंने,

अश्क़ों में जो बह जाए वो जज़्बात नहीं लिखी मैंने,
रात भर जो ख़्वाब न लाये वो रात नहीं लिखी मैंने,

हाँ लिखना कुछ और ही था वह राज़ नहीं लिखी मैंने,
बिन तिरे जो गुज़ार’नी हो वो साथ नहीं लिखी मैंने,

वक़्त बेवक़्त तेरी याद लाये वो हालात नहीं लिखी मैंने,
जो लबों पर बिन सुने ही आये वो नग्मात नहीं लिखी मैंने।

-vj

Translated:

I did not write the word what was to be read,
I did not write the rain that would hit the rivage.

I did not write the emotion that would flow in the tears,
I did not write the night that don’t bring the dream throughout the night.

Yes, I wanted to write something else, I did not write that secret,
I did not write the meeting in which you are not with me.

I did not write the situation that remind me about you anytime, anywhere,
I did not write the lyrics that came without listening to the words.

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विचार

घृणा क्यों? Repellant?

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“लघुकथा”

आज फिर एक बार जब खाने की थाली प्रताप के सामने पहुँची, एक निवाला गया नहीं कि चीखा, “सरला” पता है ना! मुझे कितनी घृणा होती है, फिर भी तुम इसका ध्यान नहीं रखती हो।

सरला चौंककर! “दिखाई नहीं दिया मुझे। जान बूझ कर थोड़ी डालती हूँ, देख कर ही देती हूँ फिर भी न जाने आपकी ही थाली में कैसे पहुँच जाता है। थाली बदलती हुई नई थाली दे के चली जाती है।

प्रताप,”चेहरे की भाव भंगिमाओं को और उज़ागर करते हुए, एक-एक निवाला किसी तरह गटक जाता है और थाली से पीछा छुड़ाता है।

सरला फिर वही थाली लिए चुपचाप बाल के हिस्से को चावलों से अलग करके खाने को बैठ जाती है।

प्रताप देखकर चले जाता है….

घृणा किस चीज़ से..

खुद से या उस वस्तु से जो निर्जीव था। यहां तो सजीव तक प्रेम का हकदार नहीं होता और वो तो निर्जीव है। क्या यह जायज़ है कि हम किसी को भी घृणित समझें। उसके प्रति ऐसे विचार लाएं जो उसके लिए दुःख का कारक हो। वह निर्जीव हुई तो क्या! किसी न किसी से उसका ख़ासा रिस्ता होता है। किसे नहीं अपने बालों से प्रेम, पूछिये जिनके बाल उनसे रूठे हुए हैं, जिनके सिर से बाल ऐसे जाते हैं जैसे दरख्तों से पत्ते। आप उसके सामने उस की निंदा करते हैं, अपशिष्ट शब्दों का प्रयोग करते हैं। तब कष्ट उस निर्जीव वस्तु को नहीं उस प्रेमी को होता है।

 कोई भी वस्तु किसी न किसी से किसी न किसी प्रकार संबंधित है। अगर हम घृणा शब्द का प्रयोग करते हैं या घृणा ही करते हैं तो किसी न किसी को कष्ट ही दे रहे हैं। प्रेम का हकदार सब हैं। जो निर्जीव आज दिख रही आपको, कल वो भी सजीव थी उसका भी अस्तित्व था। अगर हम प्रेम नहीं दे सकते तो घृणा करने का अधिकार भी हमारा नहीं हैं।

-vj

Translated:

Today, once again when the plate of food reached in front of Pratap, a morsel was not taken yet, he was screaming, “Sarala” you know!  I hate it how much, you still don’t care about it.

Sarala shocked!  “I did not see. I don’t put it some on purpose, I still see it and still do not know how to get into your own plate. The plate goes after changing the new plate.”

Pratap, “further extinguishing the facial expressions, each one of the morsels somehow gets stuck and gets rid of the plate.

Now, Sarla takes the same plate and quietly sits down to eat food after parting away the hair from the rice.

Pratap walks away after looking ….

What is hate!

From himself or from something that was inanimate.  Here even life is not entitled to love and it is inanimate.  Is it fair that we think of anyone as disgusting.  Bring such thoughts towards him which may cause sorrow for him.  What if it was inanimate ?  He has a special way from someone or the other.  Who does not love his hair, ask those whose hair is rotten to him, whose hair goes from his head like leaves from the strings.  You condemn hair in front of him, use waste words.  Then the lover suffers, not that inanimate object.

Any object is related to one or the other via anyway.  If we use the word hate, then we are hurting someone not to that inanimate thing.  Everyone deserves love.  The inanimate that you see today, was also alive yesterday, it also existed.  If we can not give love to anyone, we do not even have the right to hate.

Please try to understand my feelings what I want to express. I know my english is too weak. Sorry for that.🙏

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शेर-ओ-शायरी

मुलाकात

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जिन मुलाक़ातों में बातें अधूरी हों, अक्सर आस जगाती है,
जैसे गर्म मौसम में, कभी-कभी वर्षा आ जाती है,
बातें सँजो कर रखना इन्हीं पलों में सम्भव है,
ग़र ना रखो फिर मुलाकातें अधूरी कहलाती हैं।

vj

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कविता

Always think forward

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“सोच सदा आगे की रख”

सोच सदा आगे की रख,
पीछे का तो सब बीत गया,
ग़र हुआ नहीं ऐसा इस बार,
समझो फिर से कोई जीत गया।

धीमी ही तूने चाल रखी,
आगे निकल तेरा मीत गया,
वो खुशी के गाता गीत गया,
तिरा इक सपना फिर अतीत भया।

हाथों में तिरे कुछ न लगा,
वह फिर से दुःखातीत भया।

अब वक़त हुआ आशातीत बन,
कुछ ऐसा नहीं जो छूट गया,
सोच सदा आगे की रख,
पीछे का तो सब बीत गया।

-vj

Translated:

Always keep thinking ahead,
everything behind us has been passed,
if you will not do best this time,
you must think that someone has won again.

Your every move was too slow,
that’s why your fellow has overtaken you.
He sang the songs of happiness,
& your happiness became dream again.

You get nothing in your hands,
and he felt the happiness again.

Now its time to be hopefulness,
you still have the the chance to get.
Always keep thinking ahead,
everything behind us has been passed.

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कविता

Sleeping.. Sleeping

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“निद्रा”

जब थकावट में सदियों की निद्रा पास आती है,
सर हवाओं में झूमकर, बिस्तर की याद दिलाती है,
आँख अंधेरे में खोकर सब कुछ भूल जाता है,
तन को तब सिर्फ, सोने में मजा आता है।

मैं बत्तियाँ बुझाया या नहीं कहाँ सोचता हूँ,
बिस्तर भी लगाया या नहीं कहाँ खोजता हूँ,
ये सभी न जाने किस अंधेरे में खो जाती हैं,
वो कुर्सियां वो टेबल मेरा बिस्तर हो जाती हैं।

तब वो चैन और सुकूँ, मैं सोकर ही पाता हूं,
जिन्हें ढूढ़ने मैं, जग कर ही लग जाता हूँ,
यूँ उठ जाने पर सुकूँ फिर कहाँ रास आती है,
जो थकावट में सदियों की निद्रा पास लाती है।

-vj

Translated:

When centuries of sleep come to exhaustion,
the head reminds me about the bed, swinging in the wind,
eye forgets everything to lost in the darkness,
then the body enjoys only sleeping.

I do not think about the lights, they are extinguished or not,
i do not find the bed, it’s near to me or not,
they all get lost in the unknown darkness,
Those chairs, those tables became my bed at then.

Then that relax and patience, i get via. sleeping,
whom i need to find after awakening,
after waking up, it’s not necessary we will get happiness or not,
which brings centuries of sleep in exhaustion.

:Sleeping is the best gift of Lord.

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कविता

Life journey

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“जीवन एक सफर”

हम क्या लेकर आये थे,
क्या लेकर जाएंगे,
कुछ पास नहीं था मेरे,
क्या देकर जाएंगे। 

कुछ अच्छे कर्म बनाकर हम,
खुशियाँ लेकर आये थे,
कुछ अच्छे कर्म सँजोकर हम,   
यादें देकर जाएंगे।

मुट्ठी में थोड़ी लकीर लिये,
यूँ रोते-रोते आये थे,
उस आखिरी सफ़र में हम,
सोते-सोते जाएंगे।

सब कुछ हासिल करने आये थे,
सब कुछ हासिल कर जाएंगे,
पर वक़्त की आखिरी मोड़ पर,
सब खोते-खोते जाएंगे।

यह जीवन एक सफर है,
सब मुसाफ़िर बन यहाँ आएंगे,
बस अपनी बारी आज यहाँ,
कल हम भी मुसाफ़िर कहलाएंगे।

रक्खा मन में कोई द्वेष नहीं,
ना ही रख कर कुछ जाएंगे,
सब से मिल जुल के हम,
अपना हर वक़्त बिताएंगे।

बस मोह के बंधन में बंधकर,
सब करते ही चले जाएंगे,
जब आँखें बंद करूंगा मैं,
सब ख़्वाब ही कहलाएंगे।

हम कुछ लेकर ना आये थे,
ना ही कुछ लेकर जाएंगे,
पर जितना वक़्त मिला हम को,
हम सब को देकर जाएंगे।

जब साथ नहीं होंगे हम,
जब पास नहीं होंगे हम,
सब इन यादों और बातों से,
थोड़ा तो वक़्त बिताएंगे।

कुछ अच्छे कर्म बनाकर हम,
खुशियाँ लेकर आये थे,
कुछ अच्छे कर्म सँजोकर हम,   
बस यादें देकर जाएंगे।

-vj

Translated:

What did we bring,
what else will we take from here,
i had nothing in my hand,
what will we give when we leave.

By making some good deeds,
we brought happiness,
By making some good efforts,
we will give memories.

With a slight lines in the fist,
we started our journey via weeping,
In that last of the journey,
we will go with great sleeping.

We came to achieve everything,
and will get everything,
but at the last turn of time,
we will lost that everything.

This life is a journey,
everyone has came here as a traveler,
now it’s our turn today,
tomorrow we will also be called as a traveler.

Kept no malice in the mind,
neither will take any malice nor I give,
Mostly, we will spend all our time with everyone.

Just in the bondage of fascination,
we will keep doing everything,
when will I close my eyes,
all will be called dreams.

We did not bring anything,
neither will not take anything,
but the time we got here,
we will give it to everyone.

When will we not be together,
when will we not close,
You will spend your time,
with all these memories and things,

What did we bring,
What else will we go from here,
I had nothing in my hand,
What will we give when we leave.