Categories
शेर-ओ-शायरी

बस लिखूंगा

जमा थी ऐब जितनी उन्हें ही पन्नों पर उतार रहा हूँ,
ना जाने कौन-सी सदी से यहाँ गिरफ्तार रहा हूँ।

-vj

शब्दावली: रूह- दिल, मसरुर- आनंदित, ऐब- बुराइयां

छवि श्रेय: इंटरनेट

By साधक

Poetries | Poems | Ghazals | Sher-o-shyaries

12 replies on “बस लिखूंगा”

बहोतख़ूब बंधु 👌

ना जाने कौन सा मर्ज थी, बीमार कर गयी,
पास होते तो शायद मुकम्मल हो जाते।

Liked by 2 people

उम्दा👌

हो सकता है, मैं गुमनाम हो जाऊं कल, पर आज बीता तो नहीं,
मैं अपनी आदतों से तुम्हारे लिए, ज़रूरत भर की कहानियां छोड़ जाऊंगा।

Liked by 1 person

बस कोशिश करता हूँ बंधु। वक्त मिले तो मेरी और भी कविताएं अवश्य पढ़ें, शुक्रिया🙏

Liked by 1 person

Leave a Reply to meenawalia Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s