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कविता

फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए

Prayer or wish

फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए,
महफिलों से भरा, इक शाम चाहिए,
डबडबाता हुआ, इक ज़ाम चाहिए,
फुर्सत ही न मिले, वो काम चाहिए,
मुझे भी अब आराम चाहिए,
झुके सर मिरा भी, वो धाम चाहिए,
ग़मों से लथपथ शहर नहीं…
खुशियों भरा ग्राम चाहिए,

फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए।

ज़िन्दगी में बस थोड़ा-सा जाम चाहिए,
कहीं-कही अल्पविराम चाहिए,
कभी-कभी अंत्यविराम चाहिए,
हर काम मिरा तमाम चाहिए,
ऐसा ही कुछ इंतज़ाम चाहिए,
गर्मी में शीतलता हो बहोत,
शर्दी में….. घाम चाहिए,

फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए।

मंज़िल पर पहुँचूँ वो गाम चाहिए,
दर्द में मरहम और बाम चाहिए,
इस शुकूँ की बस्ती में…
हर दरिंदा बदनाम चाहिए,
मुझे कटहल नहीं, आम चाहिए,
कॉमा नहीं, पूर्णविराम चाहिए,
किसी गली में नहीं, सरेआम चाहिए,
मुझे मेरे हक़ का इनाम चाहिए,

फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए।

-vj

Prayer: An expression of conscience.

छवि श्रेय: इंटरनेट

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शेर-ओ-शायरी

बेरोजगार

मैं पूछूं किरदार जमाने से, रोजगार पूछता है,
तसल्ली हो ना हो, मेरा ख़ुमार पूछता है,
ढल जाना नज़्म नहीं, जरूरत है मेरी,
गुनाह क्या इस ज़िल्लत की, बेरोजगार पूछता है।

-vj

Unemployment is a mental state of human mind. It is gifted to us by the society. Honestly I will say, we ourselves are in a race where we surely get it any stage of life. Everyone has to take this crown in his life. So don’t worry and enjoy this stage of life.

छवि श्रेय: इंटरनेट

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कविता

मेरी बहना मुझे पता है

The best think about having a sister is that you have a permanent gift from Lord.

मैं कौन हूँ, क्या हूँ सब जानती है तू,
मेरी बहना मुझे पता है कितना मानती है तू,

हाथों की लकीरें साज़िशें कर रहीं, ख़बर किसे!
पर हर साज़िशों का ठिकाना बख़ूबी पहचानती है तू,
क़हर-ए-वक़त का जब भी होता हूँ मारा,
हौसला-ए-बहार लिए रूह में जान डालती है तू,
मेरी बहना मुझे पता है कितना मानती है तू।

वो बापू की ख़ामोशी को अल्फ़ाज़ दे जाना,
माँ के गुस्से को मुस्कुराहट के आगाज़ दे जाना,
मुझ जैसे आलसी को थोड़े काम-काज़ दे जाना,
हाँ ऐसे ही घर की खुशियों के तराने बांधती है तू,
मेरी बहना मुझे पता है कितना मानती है तू।

किसी रुख़-ए-हवा से डरना नहीं कभी,
मंज़िल पे पहुँचने से पहले ठहरना नहीं कभी,
हर मुश्किलों से टकराने की ताक़त है तुझमें,
वो सारी दुवाएँ तिरी, जितनी इबादत है मुझमें,
बस ऐसे ही रहना जैसे रहना जानती है तू,
मेरी बहना मुझे पता है कितना मानती है तू।

–vj

It’s an open proposal to everyone if anyone like to be my sister, I will accept.

छवि श्रेय: इंटरनेट

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शेर-ओ-शायरी

डरना क्या!

डरना क्या!

हर बातें मेरी ख़ारिज हो रही है,
लगता है कोई साज़िश हो रही है,
डरना क्या अब उन साज़िशों से,
छाता निकालो, समझो बारिश हो रही है।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट

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कविता

बस चंद तस्वीरों की मेरी कहानी

बस चंद तस्वीरों की मेरी कहानी,
इक बचपन था, कल बुढ़ापा, आज जवानी,
हाँ, याद है मुझे, मैंने भी की थी मनमानी,
वो बचपन ही था जो छिप जाता था,
चाहे कितनी भी हो शैतानी,
ना कोई सीमा ही होती,
ना कम होती, हरकतें बचकानी,
अब छूट गयी मनमानी,
और छूट गयी शैतानी,
वो राजा रानी की कहानी,
बस यादों में, जानी पहचानी,
बस चंद तस्वीरों की मेरी कहानी,
इक बचपन था, कल बुढ़ापा, आज जवानी।

-vj

Everything is different when you’re a child: the trees are higher, the colours are brighter, and every new day is more interesting that the last. Even more importantly, some things happen that stay in our memory for a long time — in fact, sometimes they end up being with us forever.

छवि श्रेय: इंटरनेट/साधक

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शेर-ओ-शायरी

कम करते रहेंगे

I love to write not to fight.

हम अपनी ख़्वाईशो का गम, कम करते रहेंगे,
जब-जब उमड़ेगा शैलाब रक़म करते रहेंगे।

रक़म- लिखना

छवि श्रेय: इंटरनेट

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कविता

तेरा यार हूँ

“Friendship”

रुक कर देख चौराहे पर,
मैं उस पार हूं,
ज़रा और गौर से देख,
तेरा यार हूं।

दो-चार मुलाकातें, कम क्या हुई,
सकल भूल गया,
ज़र्फ़-ए-दिल में रखा,
पहला प्यार हूं।

हूं जानता,
था बहोत दूर हो गया,
बस समझ इतना, था मजबूर हो गया,
पर दिल के तह-ख़ाने में तू,
न जाने कब का था मशहूर हो गया।

अब अर्ज़-ए-ग़म का किस्सा,
कह सुनने को तैयार हूँ,
मैं अब भी तो तेरा यार हूँ।

किस सोच में पड़ा,
किस बात पर अड़ा,
ज़रा देख गौर से,
मैं अब भी हूं खड़ा,
वो लाल कमीज़, वो मटमैला जूता,
और पहने हुए, हाथों में कड़ा।

हाँ शर्ट मेरा अब भी है बड़ा,
जिसके लिए, तू मुझसे था लड़ा,
मेरा कपड़ा…मेरा कपड़ा।

बहोत हुआ…
कुछ बोल ज़रा अब तू भी,
कि मिलने को तैयार हूं,
मैं भी रस्ते उस पार हूँ,
तू शोला, मैं अंगार हूँ,
तू नौका, मैं पतवार हूँ।
तू रिश्ता-ए-लतीफ़ मिरा,
और मैं भी तेरा यार हूँ।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट

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कविता

मैं कैसा हो गया हूँ, कोई बताएगा क्या

यह पोस्ट डालने से पूर्व मैं अपनी आवाज़ में अपने पसंदीदा गीतों में से एक गीत की दो पंक्तियाँ गाकर जीवन के प्रति अपने मनोभाव प्रस्तुत करता हूँ।

मैं कैसा हो गया हूँ, कोई बताएगा क्या,
कुछ पल का अपनापन कोई जतायेगा क्या,
यूँ ख़ामोशी, मायूसी में ढ़लता जा रहा हूँ,
इन गहराइयों से निकलने का रस्ता, कोई दिखायेगा क्या,
मैं कैसा हो गया हूँ, कोई बताएगा क्या।

यह जो वक़्त है सिर्फ खुशियों का संगीत नहीं,
यह गम का इक नगमा भी है, बीत पाएगा क्या,
अब आस लिए बैठा हूँ, इस नग़मे को और न सुन पाने की,
खुशियों का वो नज़्म फिरसे रास आएगा क्या,
मैं कैसा हो गया हूँ कोई बताएगा क्या।

बड़े ख़यालात पाल लिए हमने,
वो दुज़ो के आलीशान बँगले देखकर,
खुशियाँ सजा लेता हूँ मैं, ऐसे ही आँखे सेंक कर,
ऐसे पल पल के लम्हों से, सफ़र बीत पाएगा क्या,
मैं कैसा हो गया हूँ कोई बताएगा क्या।

कभी-कभी तो लगता है ऐसा, कितना टूट गया हूँ,
ख़ामोशी इतनी होती है, जैसे खुद से ही रूठ गया हूँ,
अब ऐसा पल न दो जिससे बातें कम हो जाएं,
यूँ घुट-घुट कर तन्हाई में आँखे नम हो जाएं,
ऐ खुदा, हर दफ़ा ऐसे कोई सतायेगा क्या,
मैं कैसा हो गया हूँ, कोई बताएगा क्या।

यह कुछ छणों का आशियाँ थोड़ी है, जो झेल लूँ,
खुशियां इतनी तो दो, जिनसे मन भर खेल लूँ,
वक्त और सब्र तो बहोत है, इसलिए इंतज़ार में हूँ,
ऐ खुदा, बता दो ऐसा कोई वक़्त आएगा क्या,
कुछ पल का सही अपनापन कोई जतायेगा क्या,
मैं कैसा हो गया हूँ, कोई बताएगा क्या।

-vj

चित्र श्रेय: इंटरनेट

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शेर-ओ-शायरी

कोई जल्दी नहीं

Wait for your chance.

ऐसी भी कोई जल्दी नहीं, आराम से जा सकते हैं,
हाथ में वक़्त बहोत है पड़ा, उपयोग में ला सकते हैं,
हाँ रुकना यहाँ मुनासिब नहीं, धीरे से कदम बढ़ा सकते हैं,
अक़्सर थोड़ा-सा ठहरकर भी मंज़िल हाथ लगा सकते हैं।”

-vj

There is nothing better than being a late bloomer, that always happens in anyone’s life. Success can happen at any time and at any age. You can have a spiritual awakening and discover a new side of yourself. It must be understood before learning anything. When we become well aware of something, then we get that thing.

छवि श्रेय: इंटरनेट

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शेर-ओ-शायरी

मत पूछ

The bright side of sadness.


मत पूछ पता ज़माने से, मेरा मकाँ जानता है,
मैं मयख़ाने में हूँ बे-ख़बर, यह जहाँ जानता है,
वो तुझे छोड़ जाएगा मेरे दर पर, ऐ दोस्त,
मैं तुझे किस हाल में मिलूंगा, तू कहाँ जानता है।

-vj

छवि श्रेय: इंटरनेट