Untold words.

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“नहीं लिखी मैंने”

जो बात पढ़ी जानी थी वो बात नहीं लिखी मैंने,
दरिया से जो टकराये वो बरसात नहीं लिखी मैंने,

अश्क़ों में जो बह जाए वो जज़्बात नहीं लिखी मैंने,
रात भर जो ख़्वाब न लाये वो रात नहीं लिखी मैंने,

हाँ लिखना कुछ और ही था वह राज़ नहीं लिखी मैंने,
बिन तिरे जो गुज़ार’नी हो वो साथ नहीं लिखी मैंने,

वक़्त बेवक़्त तेरी याद लाये वो हालात नहीं लिखी मैंने,
जो लबों पर बिन सुने ही आये वो नग्मात नहीं लिखी मैंने।

-vj

Translated:

I did not write the word what was to be read,
I did not write the rain that would hit the rivage.

I did not write the emotion that would flow in the tears,
I did not write the night that don’t bring the dream throughout the night.

Yes, I wanted to write something else, I did not write that secret,
I did not write the meeting in which you are not with me.

I did not write the situation that remind me about you anytime, anywhere,
I did not write the lyrics that came without listening to the words.

घृणा क्यों? Repellant?

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“लघुकथा”

आज फिर एक बार जब खाने की थाली प्रताप के सामने पहुँची, एक निवाला गया नहीं कि चीखा, “सरला” पता है ना! मुझे कितनी घृणा होती है, फिर भी तुम इसका ध्यान नहीं रखती हो।

सरला चौंककर! “दिखाई नहीं दिया मुझे। जान बूझ कर थोड़ी डालती हूँ, देख कर ही देती हूँ फिर भी न जाने आपकी ही थाली में कैसे पहुँच जाता है। थाली बदलती हुई नई थाली दे के चली जाती है।

प्रताप,”चेहरे की भाव भंगिमाओं को और उज़ागर करते हुए, एक-एक निवाला किसी तरह गटक जाता है और थाली से पीछा छुड़ाता है।

सरला फिर वही थाली लिए चुपचाप बाल के हिस्से को चावलों से अलग करके खाने को बैठ जाती है।

प्रताप देखकर चले जाता है….

घृणा किस चीज़ से..

खुद से या उस वस्तु से जो निर्जीव था। यहां तो सजीव तक प्रेम का हकदार नहीं होता और वो तो निर्जीव है। क्या यह जायज़ है कि हम किसी को भी घृणित समझें। उसके प्रति ऐसे विचार लाएं जो उसके लिए दुःख का कारक हो। वह निर्जीव हुई तो क्या! किसी न किसी से उसका ख़ासा रिस्ता होता है। किसे नहीं अपने बालों से प्रेम, पूछिये जिनके बाल उनसे रूठे हुए हैं, जिनके सिर से बाल ऐसे जाते हैं जैसे दरख्तों से पत्ते। आप उसके सामने उस की निंदा करते हैं, अपशिष्ट शब्दों का प्रयोग करते हैं। तब कष्ट उस निर्जीव वस्तु को नहीं उस प्रेमी को होता है।

 कोई भी वस्तु किसी न किसी से किसी न किसी प्रकार संबंधित है। अगर हम घृणा शब्द का प्रयोग करते हैं या घृणा ही करते हैं तो किसी न किसी को कष्ट ही दे रहे हैं। प्रेम का हकदार सब हैं। जो निर्जीव आज दिख रही आपको, कल वो भी सजीव थी उसका भी अस्तित्व था। अगर हम प्रेम नहीं दे सकते तो घृणा करने का अधिकार भी हमारा नहीं हैं।

-vj

Translated:

Today, once again when the plate of food reached in front of Pratap, a morsel was not taken yet, he was screaming, “Sarala” you know!  I hate it how much, you still don’t care about it.

Sarala shocked!  “I did not see. I don’t put it some on purpose, I still see it and still do not know how to get into your own plate. The plate goes after changing the new plate.”

Pratap, “further extinguishing the facial expressions, each one of the morsels somehow gets stuck and gets rid of the plate.

Now, Sarla takes the same plate and quietly sits down to eat food after parting away the hair from the rice.

Pratap walks away after looking ….

What is hate!

From himself or from something that was inanimate.  Here even life is not entitled to love and it is inanimate.  Is it fair that we think of anyone as disgusting.  Bring such thoughts towards him which may cause sorrow for him.  What if it was inanimate ?  He has a special way from someone or the other.  Who does not love his hair, ask those whose hair is rotten to him, whose hair goes from his head like leaves from the strings.  You condemn hair in front of him, use waste words.  Then the lover suffers, not that inanimate object.

Any object is related to one or the other via anyway.  If we use the word hate, then we are hurting someone not to that inanimate thing.  Everyone deserves love.  The inanimate that you see today, was also alive yesterday, it also existed.  If we can not give love to anyone, we do not even have the right to hate.

Please try to understand my feelings what I want to express. I know my english is too weak. Sorry for that.🙏

मुलाकात

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जिन मुलाक़ातों में बातें अधूरी हों, अक्सर आस जगाती है,
जैसे गर्म मौसम में, कभी-कभी वर्षा आ जाती है,
बातें सँजो कर रखना इन्हीं पलों में सम्भव है,
ग़र ना रखो फिर मुलाकातें अधूरी कहलाती हैं।

vj

Always think forward

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“सोच सदा आगे की रख”

सोच सदा आगे की रख,
पीछे का तो सब बीत गया,
ग़र हुआ नहीं ऐसा इस बार,
समझो फिर से कोई जीत गया।

धीमी ही तूने चाल रखी,
आगे निकल तेरा मीत गया,
वो खुशी के गाता गीत गया,
तिरा इक सपना फिर अतीत भया।

हाथों में तिरे कुछ न लगा,
वह फिर से दुःखातीत भया।

अब वक़त हुआ आशातीत बन,
कुछ ऐसा नहीं जो छूट गया,
सोच सदा आगे की रख,
पीछे का तो सब बीत गया।

-vj

Translated:

Always keep thinking ahead,
everything behind us has been passed,
if you will not do best this time,
you must think that someone has won again.

Your every move was too slow,
that’s why your fellow has overtaken you.
He sang the songs of happiness,
& your happiness became dream again.

You get nothing in your hands,
and he felt the happiness again.

Now its time to be hopefulness,
you still have the the chance to get.
Always keep thinking ahead,
everything behind us has been passed.

Sleeping.. Sleeping

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“निद्रा”

जब थकावट में सदियों की निद्रा पास आती है,
सर हवाओं में झूमकर, बिस्तर की याद दिलाती है,
आँख अंधेरे में खोकर सब कुछ भूल जाता है,
तन को तब सिर्फ, सोने में मजा आता है।

मैं बत्तियाँ बुझाया या नहीं कहाँ सोचता हूँ,
बिस्तर भी लगाया या नहीं कहाँ खोजता हूँ,
ये सभी न जाने किस अंधेरे में खो जाती हैं,
वो कुर्सियां वो टेबल मेरा बिस्तर हो जाती हैं।

तब वो चैन और सुकूँ, मैं सोकर ही पाता हूं,
जिन्हें ढूढ़ने मैं, जग कर ही लग जाता हूँ,
यूँ उठ जाने पर सुकूँ फिर कहाँ रास आती है,
जो थकावट में सदियों की निद्रा पास लाती है।

-vj

Translated:

When centuries of sleep come to exhaustion,
the head reminds me about the bed, swinging in the wind,
eye forgets everything to lost in the darkness,
then the body enjoys only sleeping.

I do not think about the lights, they are extinguished or not,
i do not find the bed, it’s near to me or not,
they all get lost in the unknown darkness,
Those chairs, those tables became my bed at then.

Then that relax and patience, i get via. sleeping,
whom i need to find after awakening,
after waking up, it’s not necessary we will get happiness or not,
which brings centuries of sleep in exhaustion.

:Sleeping is the best gift of Lord.

Life journey

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“जीवन एक सफर”

हम क्या लेकर आये थे,
क्या लेकर जाएंगे,
कुछ पास नहीं था मेरे,
क्या देकर जाएंगे। 

कुछ अच्छे कर्म बनाकर हम,
खुशियाँ लेकर आये थे,
कुछ अच्छे कर्म सँजोकर हम,   
यादें देकर जाएंगे।

मुट्ठी में थोड़ी लकीर लिये,
यूँ रोते-रोते आये थे,
उस आखिरी सफ़र में हम,
सोते-सोते जाएंगे।

सब कुछ हासिल करने आये थे,
सब कुछ हासिल कर जाएंगे,
पर वक़्त की आखिरी मोड़ पर,
सब खोते-खोते जाएंगे।

यह जीवन एक सफर है,
सब मुसाफ़िर बन यहाँ आएंगे,
बस अपनी बारी आज यहाँ,
कल हम भी मुसाफ़िर कहलाएंगे।

रक्खा मन में कोई द्वेष नहीं,
ना ही रख कर कुछ जाएंगे,
सब से मिल जुल के हम,
अपना हर वक़्त बिताएंगे।

बस मोह के बंधन में बंधकर,
सब करते ही चले जाएंगे,
जब आँखें बंद करूंगा मैं,
सब ख़्वाब ही कहलाएंगे।

हम कुछ लेकर ना आये थे,
ना ही कुछ लेकर जाएंगे,
पर जितना वक़्त मिला हम को,
हम सब को देकर जाएंगे।

जब साथ नहीं होंगे हम,
जब पास नहीं होंगे हम,
सब इन यादों और बातों से,
थोड़ा तो वक़्त बिताएंगे।

कुछ अच्छे कर्म बनाकर हम,
खुशियाँ लेकर आये थे,
कुछ अच्छे कर्म सँजोकर हम,   
बस यादें देकर जाएंगे।

-vj

Translated:

What did we bring,
what else will we take from here,
i had nothing in my hand,
what will we give when we leave.

By making some good deeds,
we brought happiness,
By making some good efforts,
we will give memories.

With a slight lines in the fist,
we started our journey via weeping,
In that last of the journey,
we will go with great sleeping.

We came to achieve everything,
and will get everything,
but at the last turn of time,
we will lost that everything.

This life is a journey,
everyone has came here as a traveler,
now it’s our turn today,
tomorrow we will also be called as a traveler.

Kept no malice in the mind,
neither will take any malice nor I give,
Mostly, we will spend all our time with everyone.

Just in the bondage of fascination,
we will keep doing everything,
when will I close my eyes,
all will be called dreams.

We did not bring anything,
neither will not take anything,
but the time we got here,
we will give it to everyone.

When will we not be together,
when will we not close,
You will spend your time,
with all these memories and things,

What did we bring,
What else will we go from here,
I had nothing in my hand,
What will we give when we leave.

सीख रहा.. learning

सोचा कुछ गुनगुना लूं 🎶 ऐसे ही ज़ुबाँ पर आ गया तो डाल दिया 🙏

लफ़्ज़ों की ख़बर नहीं कोई,
वह कौन है जो भीतर से चीख़ रहा है,

ख़ामोशी से दोस्ती कर, मिरा कलम,
नक़्श छोड़ना सीख रहा है।

-vj

Translated:

No news of the pains,
who is the one screaming from inside the heart,

Befriending with the silence, my pen,
has started learning to leave words on the papers.